गोपेश्वर (चमोली)। गैरसैण को उत्तराखंड की स्थाई राजधानी बनाये जाने की मांग को लेकर चमोली जिला मुख्यालय गोपेश्वर से आंदोलनकारी प्रवीण काशी के नेतृत्व में शुक्रवार को नंगे पांव पदयात्रा शुरू हुई। जो 25 नवम्बर को गैरसैण पहुंचेगी।
शुक्रवार को गोपेश्वर गोपीनाथ मंदिर से पदयात्रा को जिला बार संघ के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता भरत सिंह रावत ने पद यात्रियों के हाथ में तिरंगा देकर पदयात्रा को रवाना किया। गैरसैण स्थाई राजधानी और एक राज्य एक राजधानी के नारों के साथ यह पद यात्रा शुरू हुई। इस पद यात्रा टीम का नेतृत्व आन्दोलनकारी युवा प्रवीण काशी कर रहे हैं। उनका कहना है कि उत्तराखंड जैसे छोटे से राज्य में दो राजधानी की कोई जरुरत नहीं है। सरकार अंग्रेजी हुकूमत की तर्ज पर अपने मौजमस्ती के लिए दो राजधानी बना कर जनता के टैक्स के पैसे को बर्बाद कर रही है। जहां जनता को दो गुणा रोजगार, सैलरी, हास्पीटल, स्कूल सडक, बिजली और लोन भरने के लिए पैसे की जरुरत है वहां सरकार टैक्स का पैसा दो राजधानी बना कर बर्बाद कर रही। उन्होंने कहा कि भारत वर्ष की एक राजधानी है नई दिल्ली कभी तमिलनाडु या मणिपुर के लोगों ने यह नहीं तर्क दिया कि राजधानी हमसे दूर है लेकिन उत्तराखंड के नेताओं ने हरिद्वार और ऊधमसिंह मे कुतर्क गढ कर गैरसैंण और पहाड़ के विरुद्ध राजनीति को पोषित कर रहे।
प्रवीण काशी का कहना है कि जब तक उत्तराखंड सरकार गैरसैंण मे नहीं बैठेगी पर्वतीय कृषि और उद्योग नीति नहीं बनेगी और जब तक ऐसा नहीं होता पलायन नही रुकेगा। उत्तराखंड बनने के बाद 35 लाख लोग पहाड़ छोड़ कर पलायन करने को बाध्य हुए। करीब चार हजार गांव भूतहा हो गए। उन्होंने कहा कि यदि आल वेदर रोड बन सकता है, कर्णप्रयाग तक रेल जा सकती है, टिहरी और पंचेश्वर बांध बन सकते हैं तो गैरसैंण स्थाई राजधानी क्यों नहीं बन सकती। गैरसैण स्थाई राजधानी की मांग के लिये इस पद यात्रा में प्रवीण सिंह काशी, बीरेंद्र सिंह मिंगवाल, विक्रम सिंह नेगी, कुलदीप सिंह बिष्ट, अरविंद हटवाल, भगत सिंह बत्र्वाल, दीपक फरस्वाण और दिनेश बहुगुणा टिहरी, मोहित कुकरेती (देहरादून), आयुष धामी (हल्द्वानी,) चल रहे हैं। पद यात्रा शुरू करने से पूर्व पद यात्रियों ने गोपीनाथ मंदिर में पूजा अर्चना और हवन किया। इस अवसर पर बार संघ के अध्यक्ष भरत सिंह रावत, गजेन्द्र सिंह बिष्ट, उत्तराखंड राज्य आन्दोलनकारी मनीष नेगी, भगत बत्र्वाल, अनुराग पोखरियाल, योगेन्द्र सिंह बिष्ट, मौजूद रहे।
