गोपेश्वर (चमोली)। आखिरकार नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से नंदा की बड़ी जात निकालने की घोषणा कर दी गई है। इसके तहत 5 सितम्बर को बड़ी जात का आगाज होगा। इस दौरान बड़ी जात के आयोजन को लेकर अब तैयारियों पर जोर दिया जाएगा। कुरूड़ मंदिर में गौड़ ब्राह्मणों ने आयोजकों की मौजूदगी में पूजा अर्चना के पश्चात बड़ी जात के आयोजन की घोषणा की। इसके तहत पांच सितम्बर से बड़ी जात का आगाज होगा। कुरूड़ में बड़ी संख्या में मौजूद लोगों की मौजूदगी में यह घोषणा की गई। इस दौरान देवी के पश्वा भी अवतरित हुए और बड़ी जात पर मां नंदा ने जाने की हामी भरी। इस पर लोगों ने करतल ध्वनि से घोषणा का स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान भजन कीर्तन और धार्मिक गीतों की प्रस्तुति से कुरूड़ मंदिर परिसर धर्ममय हो चला। कुरूड़ मंदिर समिति ने कार्यक्रम की सभी तैयारियों को आगे बढ़ाने का भी ऐलान किया। कुरूड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखवीर रौतेला के अनुसार नंदा की बड़ी जात के लिए तिथि की घोषणा हो गई है। अब बड़ी जात संचालन के लिए व्यवस्थाओं की तैयारियां प्रारंभ की जाएगी। उन्होंने कहा कि पौराणिक आस्था और परंपरा से जुड़ी बड़ी जात किसी भी परिस्थिति में नहीं रोकी जा सकती थी। इसके चलते ही कुरूड़ से इस बार बड़ी जात निकालने पर सभी लोगों ने हामी भरी। एक तरह से अब इस बार बड़ी जात का आयोजन कुरूड से होने जा रहा है। देवडोलियों का रूट मैप भी तैयार किया गया है। इसके तहत अन्य डोलियां भी इसी तरह होमकुंड तक जाएंगी।
बधाण की नंदा का यह रहेगा रूट मैप।
5 सितम्बर 26- सिद्धपीठ कुरूड से चरबंग।
6 सितम्बर 26- चरंबग से कुंडबगड होते हुए मथकोट।
7 सितम्बर 26- मथकोट से धरगांव, नंदानगर होते हुए उस्तोली।
8 सितम्बर 26- उस्तोली से सरपाणी, लांखी होते हुए भेंटी।
9 सितम्बर 26- भेंटी से स्यांरी बंगाली होते हुए डुंग्री।
10 सितम्बर 26- डुंग्री से केरा, मैन होते हुए सूना।
11 सितम्बर 26- सूना से थराली, राडीबगड होते हुए चेपडों।
12 सितम्बर 26- चेपडों से कोठी होते हुए नंदकेशरी। (गढ़वाल तथा कुमाऊ की राज छंतोलियों का मिलन)।
13 सितम्बर 26- नंदकेशरी से पूर्णा, देवाल, इच्छोली, हाट होते हुए फल्दियागांव।
14 सितम्बर 26- फल्दियागांव से कांडई, लबू, ल्वाणी, बगडीगाढ़ होते हुए मुदोली।
15 सितम्बर 26- मुंदोली से लोहाजंग, कार्तिकबगड़, देवी लाटू मिलन वाण।
15 सितम्बर 26- वाण से रणकधार होते हुए गैरोलीपातल।
17 सितम्बर 26- गैरोलीपातल से डोलीधार होते हुए बेदनी।
18 सितम्बर 26- बेदनी में नंदा सप्तमी पूजा के बाद पातर नचौणियां।
19 सितम्बर 26- पातर नचौणियां से कलवा बिनायक, रूपकुंड, ज्यूंरागली-शिलासमुंद्र।
20सितम्बर 26- शिलासमुद्र से पंचगंगा, होमकुंड में बडी जात और जामुनडाली।
21 सितम्बर 26- जामुनडाली से तातडा होते हुए सुतोल।
22 सितम्बर 26- सतोल से कनोल होते हुए वाण।
23 सितम्बर 26- वाण से कुलिंग।
24 सितम्बर 26- कुलिंग से बगडीगाढ होते हुए ल्वाणी।
25 सितम्बर 26- ल्वाणी से उलंग्रा।
26 सितम्बर 26- उलंग्रा से हाट होते हुए वेराधार।
27 सितम्बर 26- वेराधार से टुनरी होते हुए गोठिंडा।
28 सितम्बर 26- गोठिंडा से कुनीपार्था होते हुए कुराड़।
29 सितम्बर 26- सगवाडा से डांखोली।
30 सितम्बर 26- डांखोली से भेटा होते हुए नंदादेवी सिद्धपीठ देवराडा में छह माह का प्रवास।
दशोली की नंदा की रूट मैप
5 सितम्बर – सिद्धपीठ कुरूड से धरगांव होते हुए कुमजुग।
6 सितम्बर – कुमजुग से कुंडबगड होते हुए लुणतरा।
7 सितम्बर – लुणतरा से कांडा, खुनाणा, लामसोडा, माणखी, चोपडाकोट होते हुए कांडई।
8 सितम्बर – कांडई से खलतरा, मोठा, चाका होते हुए सेमा।
9 सितम्बर – सेमा से बैराशकुंड, इतमोली, घुवडखेत होते हुए मटई ग्वाड।
10 सितम्बर – मटई ग्वाड से दाणू मंदिर होते हुए पगना।
11 सितम्बर – पगना से भौंधार, चरबंग होते हुए ल्वाणी।
12 सितम्बर – ल्वाणी से सुंग, बौंटाखाल होते हुए रामणी।
13 सितम्बर – रामणी से कासमातोली, घूनी, पडेरगांव, बूरा होते हुए आला।
14 सितम्बर – आला से जोखना, सितेल होते हुए कनोल।
15 सितम्बर – कनोल से वाण। (लाटू व सभी देवडोलियों का मिलन)।
16 सितम्बर – वाण से गैरोलीपातल।
17 सितम्बर – गैरोलीपातल से होते हुए बेदनी।
18 सितम्बर – बेदनी में अमुकता भरणी नंदा सप्तमी पूजा के बाद पातर नचौणियां।
19 सितम्बर – पातर नचौणियां से कलवा विनायक, रूपकुंड, ज्यूंरागली होते हुए शिलासमुंद्र।
20 सितम्बर – शिला समुंद्र से पंचगंगा, त्रिशूली, होमकुंड होते हुए जामुनडाली।
21 सितम्बर – जामुनडाली से तातडा, द्योसिंगधाम होते हुए सुतोली।
22 सितम्बर -सुतोल से फरखेल।
23 सितम्बर -फरखेत से कुंरूड नंदाधाम।
