posted on : February 8, 2026 7:09 pm

नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ और पडाव भी यात्रा मानचित्र में शामिल हों

गोपेश्वर (चमोली)। श्रीनंदादेवी राजजात यात्रा को परंपरागत रीति रिवाजों के तहत 2027 में ही आयोजित किया जाना चाहिए। इसके लिए यात्रा मार्गों और पड़ावों पर व्यवस्थाओं को अभी से सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया।

थराली ब्लॉक के देवराड़ा में परगना बधाण श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी सिद्धपीठ देवराड़ा के अध्यक्ष थोकदार पंडित भुवन चंद्र हटवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी लोगों ने श्री नंदादेवी राजजात यात्रा को 2027 में ही आयोजित करने का संकल्प लिया। बैठक में बधाण के 14 सयानों/थोकदार, बधाण गढ़ी, वाण तथा कुलसारी पडावों के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस दौरान यात्रा मार्गों और पड़ावों पर व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जाना चाहिए। कहा कि नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ समेत यात्रा पडावों को भी नंदा राजजात यात्रा के मानचित्र में शामिल किया जाना चाहिए। इससे यात्रा को विस्तार तो मिलेगा ही अपितु व्यवस्थाएं भी सुदृढ़ होंगी। कहा कि इस साल नंदा लोकजात यात्रा में इस क्षेत्र के लोग भी परंपरा के अनुसार प्रतिभाग करेंगे। सभी लोगों से इस मामले में एकजुटता बनाए रखने पर बल देने हुए कहा कि आपस में विवाद की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए। श्री नंदा राजजात बिना सरकार के सहयोग से संचालित करना संभव नहीं है। इसलिए सरकार की ओर से किए जा रहे कार्यों में सहयोग का भी संकल्प लिया गया।

बैठक में थराली के पूर्व प्रमुख सुशील रावत, देवाल के पूर्व प्रमुख डीडी कुनियाल, कुरूड़ बधाण परगना मंदिर समिति के अध्यक्ष नरेश गौड़, कुलसारी पड़ाव समिति के अध्यक्ष गोविंद सिंह भंडारी, लाटू धाम वाण समिति के अध्यक्ष कृष्णा सिंह बिष्ट, वाण की प्रधान नंदूली देवी, नंदकेसरी पडाव समिति के अध्यक्ष कलम सिंह बिष्ट, बधाण गढ़ी समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह रावत, सोल संघर्ष समिति के अध्यक्ष चरण सिंह रावत, पृथ्वी सिंह बुटोला, भूपाल सिंह गुंसाई, भूवन विक्रम सिंह, प्रेम शंकर सिंह रावत समेत तमाम लोग मौजूद रहे।

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