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posted on : June 14, 2026 6:05 pm

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के डॉ. अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र द्वारा आयोजित साप्ताहिक मंथन कार्यक्रम में एआई-संचालित भारत में भविष्य के सिविल सेवक: चुनौतियां और अवसर  विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता उत्तराखंड वन विभाग में सहायक वन संरक्षक डॉ. दिवाकर पंत रहे।

कार्यक्रम का शुभारम्भ केंद्र के समन्वयक प्रो. एमएम सेमवाल ने मुख्य अतिथि एवं प्रतिभागियों के स्वागत के साथ किया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) शासन-प्रशासन, नीति निर्माण और जनसेवा के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन ला रही है। ऐसे में भावी सिविल सेवकों के लिए इसके अवसरों और चुनौतियों को समझना बेहद जरूरी है।

अपने व्याख्यान में डॉ. दिवाकर पंत ने एआई आधारित प्रशासनिक प्रणालियों, डिजिटल गवर्नेंस, डेटा आधारित निर्णय निर्माण तथा सार्वजनिक सेवा वितरण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भविष्य के सिविल सेवकों को तकनीकी दक्षता के साथ नैतिक निर्णय क्षमता और मानवीय संवेदनशीलता का संतुलन बनाए रखना होगा।

उन्होंने बताया कि एआई के उपयोग से प्रशासनिक कार्यों में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जा सकती है, लेकिन इसके साथ डेटा गोपनीयता, एल्गोरिद्मिक पक्षपात, साइबर सुरक्षा और मानवीय मूल्यों के संरक्षण जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं।

डॉ. पंत ने वन प्रबंधन में एआई के बढ़ते उपयोग पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रिमोट सेंसिंग और उपग्रह तकनीक की सहायता से वनाग्नि की पूर्व चेतावनी, जोखिम क्षेत्रों की पहचान और त्वरित निगरानी संभव हो रही है। इसके अलावा जैव विविधता संरक्षण, वन्यजीव निगरानी और आवासीय क्षेत्रों के मानचित्रण में भी एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका मुख्य वक्ता ने विस्तार से उत्तर दिया। उन्होंने युवाओं को भविष्य की प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का संदेश दिया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. आशीष बहुगुणा ने किया। इस अवसर पर डॉ. प्रकाश सिंह, डॉ. अरविंद रावत, डॉ. वीर सिंह, डॉ. शैलेन्द्र चमोला, डॉ. मुकेश एच. सहाय सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

 
 
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