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posted on : July 10, 2026 5:52 pm
Independence Day 2026 Greetings

गोपेश्वर (चमोली)। बदरीनाथ मंदिर दान गबन मामले के उजागर होने के बाद अन्य मामलों के परत दर परत खुलने से धार्मिक रूप से प्रतिष्ठित मानी जाने वाली श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) लगातार विवादों में घिरती जा रही है। इसके चलते अब बदरीनाथ तथा केदारनाथ धामों की प्रतिष्ठा को बचाने का संकट खड़ा हो गया है।

दरअसल बदरीनाथ मंदिर में दान के चढावे का मामला उजागर होने के बाद बीकेटीसी की कार्यप्रणाली सवालों के घेरें में आ गई है। दान के चढावे में गबन का मामला अब धर्मावलंवियों की आस्था पर गहरी चोट कर गया है। हालांकि इस मामले में संबंधित कर्मचारी के निलंबन और एफआईआर दर्ज होने के बाद बीकेटीसी की अंतरिम जांच तथा शासन द्वारा गढ़वाल आयुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय हाईपावर कमेटी से करा देने के बाद भी यह मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। यह अलग बात है कि बीकेटीसी की अंतरिम जांच समिति तथा शासन की हाईपावर कमेटी जांच को लेकर अभी तत्परता नहीं दिखा पाई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस तो जांच में जुट गई है। यह मामला अभी भी तूल पकड़े हुए है। इस प्रकरण को लेकर विपक्षी कांग्रेस तथा यूकेडी लगातार सरकार और बीकेटीसी पर हमलावर बने हुए हैं। इसके चलते जगह-जगह जुलूस प्रदर्शन और पुतला दहन के कार्यक्रम चल रहे हैं।

दान गबन मामला थमने का नाम नहीं ले रहा था कि इसी बीच लेपटाॅप के गायब होने का मामला भी सुर्खियों में आ गया है। बताया जा रहा है कि बताया जा रहा है बैंकों द्वारा बीकेटीसी को प्रदान किए गए करीब 20 से 22 लेपटाॅप भी गायब चल रहे हैं। इसके अलावा अब टैंपो ट्रेबल वाहन और एंबुलेंस के भी गायब होने की बातें सुर्खियों में आने से बीकेटीसी धर्मावलंबियों के निशाने पर आ गई है। इस तरह कहा जा सकता है कि बीकेटीसी में अनियमितताओं की परत दर परत खुलती जा रही है।

बताते चलें कि बीकेटीसी का मुख्यालय जोशीमठ होने के बावजूद देहरादून में बीकेटीसी का कैंप कार्यालय वर्षों से संचालित हो रहा है। इस कार्यालय से ही अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मुख्य कार्याधिकारी आदि अब तक जमे रह कर वहीं से बीकेटीसी के कार्यों का संचालन करते आ रहे थे। मौजूदा अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने तो कैंप कार्यालय को ऋषिकेश में स्थापित करवा दिया है। भारी भरकम किराए पर कैंप कार्यालय को ऋषिकेश में स्थापित करने के लिए मंदिर समिति की तिजोरी पर व्यय भार बढ़ा दिया गया है। हालांकि ऋषिकेश में ही मंदिर समिति धर्मशालाएं अथवा लाॅज भी हैं। इनमें दफ्तर स्थापित करने के बजाय मंहगे किराए पर कैंप कार्यालय स्थापित करना किसी के गले नहीं उतर रहा था। अब यह मामला भी बहस का विषय बन गया है।

दान गबन मामले को लेकर तमाम तरह की आशंकाएं खड़ी होती जा रही है। बदरीनाथ के कांग्रेस  विधायक लखपत बुटोला तो कपाट खुलने के दिन से अब तक हुए दान की राशि को सार्वजनिक करने और इस मामले की जांच करने पर भी जोर दे रहे हैं। वैसे मंदिर समिति में कायदे कानूनों को ताक पर रखकर वीआईपी तीर्थयात्रियों को भी नहीं बख्शा जा रहा था। मंदिर समिति के बोर्ड द्वारा कोई प्रस्ताव पारित न करने के बावजूद प्रति वीआईपी को दर्शन के लिए 1100 रूपये चुकता करने पड़ रहे थे। हालांकि इससे बीकेटीसी को 1.60 करोड़ का राजस्व हासिल हुआ। अब इस पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। ऐसा इसलिए भी कि यदि वीआईपी को दर्शन के लिए 1100 रूपये चुकता करने का प्रावधान किया गया तो इसके लिए बोर्ड बैठक में प्रस्ताव क्यों नहीं पारित किया गया। अन्य मसले भी अब धीरे-धीरे उठने लगे हैं। इसके चलते बीकेटीसी की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के  घेरे में आती जा रही है। इस तरह अब बीकेटीसी कार्यप्रणाली दिन व दिन सवालों के  घेरे में आती जा रही है। शासन ने हाईपावर कमेटी बना दी है तो अब नए खुलासों की भी जांच की मांग उठ खड़ी होने लगी है। कांग्रेस से लेकर यूकेडी तक इन सवालों  पर जांच की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। अब देखना यह है कि सरकार बीकेटीसी की कार्यप्रणाली को लेकर किस तरह के कदमों के साथ आगे बढ़ती है। इससे ही बीकेटीसी को लेकर चली आ रही रार का पटाक्षेप हो पाएगा। फिलवक्त तो विधानसभा चुनाव को लेकर विपक्षी दलों का हथियार मिलने से यह धार्मिक मुद्दा बहस के केंद्र बिंदु में आ गया है।

 

 

 

 

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