गोपेश्वर (चमोली)। जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त की अदालत ने गुरूवार को आरोपी संदीप सिंह को दुराचार का दोषी मानते हुए दस साल के कठोर कारावास तथा पचास हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।
मामले के अनुसार पीडिता ने 24 जून 2017 को राजस्व उपनिरीक्षक को एक प्रार्थना पत्र दिया जिसमें अभियुक्त ने पीडिता से शादी का सांझा देकर उससे शारीरिक संबंध बनाये फलस्वरूप वह गर्भवती हो गई जिस पर चार माह बाद आरोपी पीडिता को गर्भपात के लिए कर्णप्रयाग, श्रीनगर के सरकारी अस्पतालों के साथ ही अन्य प्राईवेट चिकित्सालयों में ले गया। लेकिन चिकित्सकों ने गर्भपात करने से इंकार कर दिया जिस पर अभियुक्त ने 19 फरवरी 2016 को धारी देवी मंदिर में पीडिता से शादी कर ली और पीडिता को यह कह कर घर भेज दिया कि वह अपने परिजनों से बात कर उससे विधिवत रूप से शादी करेगा। जब पीडिता का बच्चा होने का समय आया तो अभियुक्त पीड़िता को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गया जहां पीडिता ने एक बच्चे को जन्म दिया। अभियुक्त अस्पताल से अपनी जिम्मेदारी पर दोनों को अपने कमरे पर ले गया। जहां 24 जुलाई 2017 को बच्चे की मृत्यु हो गई। जिसके बाद एक बार फिर अभियुक्त ने पीडिता को यह कह कर उसके घर भेज दिया वह अपने माता पिता से शादी की बात करेगा। उसके बाद से अभियुक्त व उसके परिजनों की ओर से पीड़िता को धमकाया जाने लगा और उस पर लांछन भी लगाये जाने लगे। पीडिता के प्रार्थना पत्र पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज होने के बाद राजस्व उपनिरीक्षक ने मामले की विवेचना कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। पीड़िता की ओर से मामले की पैरवी कर रहे जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी प्रकाश भंडारी की ओर से पेश किये गवाह और सबूतों के आधार पर जिला एवं सत्र न्यायालय की अदालत ने अभियुक्त संदीप सिंह को धारा 376 के तहत आरोपी पाते हुए दस वर्ष की कठोर कारावास की सजा तथा 50 हजार रूपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
