अनसूया मंदिर खल्ला में माता से मांगी खुशहाली की मनौती
गोपेश्वर (चमोली)। सती शिरोमणि माता अनसूया रथ डोली मंदिर खल्ला में आयोजित श्रीमद भागवत कथा (नावाह्न ज्ञान यज्ञ) सुनने के लिए भारी संख्या में में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं ने मां अनसूया से खुशहाली की मनौती मांगी।
महामंडलेश्वर 1008 स्वामी राहुलेश्वरानंद गिरी जी महाराज के सानिध्य में बगलामुखी पीठ ऋषिकेश के स्वामी बेंकटेश्वरानंद गिरी महाराज की अगुवाई में 47 साल बाद सती शिरोमणि माता अनसूया रथ डोली मंदिर खल्ला में श्रीमद देवी भागवत कथा (नावाह्न ज्ञान यज्ञ) का आयोजन हो रहा है। प्रातः मां अनसूया देवी की पूजा अर्चना की गई। मां अनसूया के जयकारों के बीच नावाह्न ज्ञान यज्ञ, कुमारी पूजन, हवन पूजन, श्री चंडी पूजन कार्यक्रम चलाया गया। इस दौरान पुजारी आत्माराम तिवाड़ी, आचार्य शेखर तिवाड़ी, पं भगवती प्रसाद त्रिपाठी, केशव प्रसाद तिवाड़ी, संजय तिवाड़ी व राकेश तिवाड़ी द्वारा धार्मिक क्रियाओं का संचालन किया गया।
श्रीमद देवी भागवत कथा में बोलते हुए कथा वाचक आचार्य मनोज चमोली ने श्रीमद देवी भागवत के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देवी भागवत के आयोजन और श्रवण से मनुष्य को सदमार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजन से लोगों का जीवन मिलता है। मां दुर्गा की नवशक्तियों का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। ब्रह्मचारिणी अर्थात तप की चारिणी-तप का आचरण करने वाली भी मां दुर्गा ही है। ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप भव्य तथा ज्योर्तिमय है। ब्रह्मचारिणी देवी के दाहिने हाथ में जप की माला तथा बांयें हाथ में कमंडर है। अपने पूर्व जन्म में हिमालय के घर पुत्री रूप में वह उत्पन्न हुई तो तब नारद के उपदेश से उन्होने भगवान शंकर को पति रूप में प्रातः करने के लिए कठिन तपस्या की थी। इसी कठिन तपस्या के कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी का नाम मिला। कहा कि देवी की उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, सदाचार, बैराग्य तथा संयम को बढावा मिलता है। उन्होने श्रद्धालुओं को मां अनुसूया के गुण चरित्रों की विस्तार से जानकारी दी। देव भूमि हिमालय की अधिष्ठात्री देवी अनुसूया पुत्रदायिनी है। यही वजह है कि देवी से मनौती करने पर ही लोगों को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। इसलिए मां अनुसूया का जप-तप करने से मानव को लाभ ही लाभ मिलता है। उन्होने हमेशा मां अनुसूया की पूजा अर्चना कर धन धान्य होने का उल्लेख करते हुए कहा कि आगे भी यह सिलसिला जारी रहना चाहिए। कथावाचक चमोली ने कहा कि आगे भी इस तरह के आयोजन होने चाहिए। इससे लोगों में सुख समृद्धि के साथ ही खुशहाली लौटती है। कहा कि चैत्र नवरात्र को ही सृष्टि प्रारंभ माना गया है। सृष्टि इससे पहले शक्तिविहीन थी। नवरात्र से ही उसमें अनेकानेक शक्ति का संचार हुआ। इसलिए चैत्र नवरात्रि प्रमुख शक्ति पर्व है। इस तरह का आयोजन श्रद्धालुओं के लिए और भी फलदायी बनेगा।
