गोपेश्वर (चमोली)। उत्तराखंड राज्य बने 21 वर्ष होने को हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाऐं आज भी बद से बदतर हालत में है। ग्रामीणों के लिए डंडी, कंडी ही 108 सेवा है। इसकी के माध्यम से मरीज को सड़क मार्ग तक पहुंचाया जाता है। यदि इस बीच कोई घटना घटित हो गई तो कोई पूछनहार भी नहीं है।
रविवार को एक बार फिर गांव में महिला के बीमार होने पर ग्रामीणों ने पांच किलोमीटर कंधों में ढोकर उसे चिकित्सालय पहुंचाया है। ऐसे में सरकार, शासन और प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं के साथ गांवों को यातयात से जोड़ने के दावों का अंदाजा लगाया जा सकता है। स्थानीय ग्रामीण प्रेम सिंह, मनवर सिंह और हीरा सिंह का ने बताया कि रविवार को पाणा गांव निवासी शंकर सिंह की 40 वर्षीय पत्नी छंचरी देवी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। गांव में उपचार की कोई व्यवस्था न होने के चलते ग्रामीणों ने महिला को पांच किलोमीटर पैदल दूरी नापकर सड़क मार्ग तक पहुंचाया। जहां से बीमार महिला को जिला चिकित्सालय लाया गया। जहां चिकित्सकों द्वारा उसका उपचार किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पाणा गांव भाजपा के जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह बिष्ट का गांव है। वहीं निजमूला घाटी से ही चमोली जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष व ग्राम प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष भी हैं। ऐसेंब्र में सरकार में गहरी पैठ रखने वाले लोगों के गृह क्षेत्र के स्वास्थ्य और सड़क की बदहाली से जिले के अन्य दूरस्थ क्षेत्रों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है
