जोशीमठ (चमोली)। चमोली जिले के जोशीमठ विकास खंड के रैंणी गांव के ग्रामीणों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। यहां इन दिनों हो रही बारिश के बाद जहां ऋषिगंगा का जल स्तर बढने लगा है। नदी के कटाव से जहां मलारी हाईवे का 40 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। वहीं रैंणी गांव के आवासीय भवन खतरे की जद में आ गये हैं। ऐसे में जहां सड़क बाधित होने से घाटी के 13 गांवों की आवाजाही बाधित हो गई है। वहीं आवासीय भवन में पड़ रही दरारों और नदी से हो रहे कटाव से रैंणी के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।

बता दें कि बीती सात फरवरी को तपोवन-रैंणी क्षेत्र में बहने वाली ऋषिगंगा नदी के उद्गम क्षेत्र में हिमस्खलन से आई जल प्रलय से रैंणी से तपोवन तक खासी तबाही मच गई थी। जिसके बाद यहां रैंणी में बीआरओ की ओर से वैली ब्रिज का निर्माण कर नीति घाटी में वाहनों की आवाजाही सुचारु करवाई गई। वहीं लोनिवि की ओर से भी यहां पैदल रास्तों और पुलों का निर्माण कर लिया गया था। लेकिन आपदा के दौरान रैंणी से तपोवन तक ऋषिगंगा नदी तटों में मलबे को जस का तस छोड़ दिया गया था। ऐसे में अब बारिश से ऋषिगंगा नदी का जल स्तर बढने पर मलबे के बहने के साथ ही यहां पहाड़ी का कटाव शुरु होते ही जहां हाईवे का 40 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। वहीं रैंणी गांव के आवासीय भवनों में दरारें आने लगी हैं। स्थानीय निवासी पुष्कर सिंह और देवेंद्र का कहना है कि आपदा के बाद प्रशासन की ओर से सड़क को दुरुस्त कर वाहनों की आवाजाही सुचारु करने के बाद यहां गांव के आसपास खुर्दबुर्द हुई पहाड़ियों को लेकर सुरक्षात्मक कार्य नहीं किये गये हैं। ऐसे में नदी के कटाव से गांव के 50 फीसदी आवासीय भवन भूस्खलन की जद में हैं। यदि बरसात के मौसम से पूर्व पुख्ता इंतजाम नहीं किये जाते तो यहां बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
रैंणी गांव में नदी के कटाव से उत्पन्न हुई स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। यहां खतरे की जद में आये भवनों को चिंहित कर परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाएगा जिससे यहां ग्रामीणों सुरक्षित बचाया जा सके।
चंद्रशेखर वशिष्ठ, तहसीलदार, जोशीमठ।
