गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले में फायर सीजन शुरु होने से पहले ही दर्जनों वनाग्नि की घटनाओं से लाखों की वन संपदा जल कर खाक हो चुकी है। यहां केदारनाथ वन प्रभाग, बदरीनाथ वन प्रभाग और नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के वन क्षेत्र में इस वर्ष बड़े पैमाने पर वनाग्नि की घटनाएं फायर सीजन शुरु होने से पहले ही घट चुकी है। जिससे इन दिनों जिले की घाटियां में धुंध छाई हुई है। विभागीय अधिकारी शीतकाल में कम बर्फवारी और बारिश के चलते वनाग्नि की घटनाएं अधिक होने की बात कह रहे हैं।
चमोली जिले में दिसम्बर माह के बाद केदारनाथ वन प्रभाग में अभी तक 20 से अधिक वनाग्नि की घटनाओं में 25 हेक्टयर से अधिक वन क्षेत्र जलकर खाक हो गया है। वहीं बदरीनाथ और नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क में आये दिन वनों के सुलगे की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही है। ऐसे में वन विभाग की ओर से वनाग्नि को लेकर किये गये इंतजामों के दावों की चमोली में पोल खुल रही है। विभागीय कार्य प्रणाली का आलम यह है कि चमोली जिला मुख्यालय के समीप बीते तीन दिनों से वन क्षेत्रों में लगी आग पर शनिवार तक भी काबू नहीं किया जा सका है। स्थानीय निवासी मनोज तिवारी, सतेंद्र कुमार और विकास का कहना है कि वनाग्नि से जहां बड़े पैमाने पर वन संपदा का नुकसान हो रहा है। वहीं घाटी में छाई धुंध स्थानीय लोगों के लिये आफत का सबब बनने लगी है। उन्होंने मामले में वन विभाग के अधिकारियो से पुख्ता कार्रवाई करते हुए वनाग्नि पर काबू करने की मांग उठाई है।
वनाग्नि की घटनाओं की रोकथाम के लिये ग्रामीणों को जागरुक किया जा रहा है। साथ आग लगने की सूचना मिलने पर कर्मचारियों की ओर से रोकथाम का कार्य भी किया जा रहा है। लेकिन कुछ स्थानों पर चट्टानी हिस्सा होने के चलते आग को बुझाना सम्भव नहीं है। ऐसे में यहां मिट्टी बिछाकर आग को फैलने से रोकने का कार्य किया जा रहा है।
अमित कंवर, डीएफओ, केदारनाथ वन प्रभाग, गोपेश्वर-चमोली।
