गोपेश्वर (चमोली)। उत्तराखंड राज्य के हिमाच्छादित क्षेत्रों में विशेष प्रावधान के तहत जनगणना 21 सितम्बर से 30 सितम्बर तक प्रस्तावित की गई है। बताते चलें कि 2027 में देश में जनगणना का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसके तहत अभी से प्रशिक्षण की कवायद शुरू कर दी गई है। अपर जिलाधिकारी विवेक प्रकाश ने बताया कि उत्तराखंड राज्य के हिमाच्छादित क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान के तहत जनगणना 11 से 30 सितम्बर तक प्रस्तावित की गई है। उन्होंने बताया कि भारत की जनगणना 2011 में संपन्न हुई थी। अब आगामी जनगणना 2027 के प्रथम चरण में किया जाना निश्चित हुआ है। इसी क्रम में संबंधित अधिकारी, चार्ज अधिकारी, चार्ज सहायक तथा अन्य कर्मचारियों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण 21 फरवरी तक चलेगा। उन्होंने बताया कि यह पहला अवसर है समूची जनगणना शत प्रतिशत डिजिटल माध्यम से संपादित की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रगणक तथा पर्यवेक्षक अपने स्वयं के मोबाइल फोन के माध्यम से आंकडों का संकलन करेंगे। प्रारंभ से अंत तक संपूर्ण संरचना, पर्यवेक्षण एवं प्रबंधन के लिए जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली (सीएमएमएस पोर्टल) का उपयोग किया जाएगा। इस बार यह पोर्टल जनगणना का एक तरह से मस्तिष्क होगा। उन्होंने कहा कि पहले चरण में मकानों का सूचीकरण और मकानों की गणना होगी। इसके तहत प्रथम चरण का काम 25 अप्रैल से 24 मई तक होगा। यह कार्य घर-घर जाकर क्षेत्रीय सर्वेक्षण के रूप में किया जाएगा। स्वगणना कार्य की अवधि 10 से 24 अप्रैल तक होगी। इसके तहत परिवारों को पहली बार एक बेव पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा। प्रगणक की ओर से इस विवरण का सत्यापन कर आंकडों का सत्यापन किया जाएगा।
एडीएम ने बताया कि जनपद की हर तहसील एवं नगर को एक विशिष्ट जनगणना चार्ट के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रत्येक चार्ज में एक चार्ज अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। चार्ज अधिकारी बेव मैपिंग एप एवं क्रिएटर एप के माध्यम से जियो टैगिंग कर हाउस लिस्टिंग ब्लाॅकों को निर्माण कर सीमाओं का निर्धारण एवं सत्यापन करेगा। उन्होंने बताया कि जनगणना 2027 के कार्य को प्राथमिकता देते हुए समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से किया जाएगा। इसके लिए जन जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण संबंधी गतिविधियां सीएमएमएस पोर्टल के माध्यम से संचालित की जाएगी। इसके तहत पहले क्षेत्रीय प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके पश्चात प्रगणकों को पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। पूर्ववर्ती जनगणना की तुलना में मौजूदा जनगणना को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जाएगा।
