गोपेश्वर (चमोली)। केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से भले ही बाल अधिकारों के संरक्षण के लिये नीति और नियम बनाये जा रहे हैं। लेकिन चमोली में बाल संरक्षण को लेकर किये जा रहे सरकारी प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। जिले में किशोर न्याय संरक्षण अधिनियम के तहत होने वाले बाल गृह का वर्तमान तक निर्माण नहीं हो सका है। मामले में विभागीय जिम्मेदार अधिकारियों की माने तो पहाड़ी जिलों में मानकों के अनुरुप भूमि की अनुपलब्धता एक बड़ी परेशानी के रुप में सामने आ रही है।
बता दें, कि बाल अपराधों में पीड़ित बच्चों के साथ ही अनाथ, चाइल्ड लेबर आदि के अधिकारों के संरक्षण के लिये सरकार की ओर से किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम के तहत राज्य के प्रत्येक जिले में बाल गृह का निर्माण करवाया जाना है। जहां अनाथ, चाइल्ड लेबर और बाल अपराध से पीड़ित बच्चों को आवास की व्यवस्था की जाएगी। लेकिन चमोली जिले में वर्तमान तक बाल गृह का निर्माण नहीं हो सका है। हालांकि जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय
की ओर से वर्तमान में समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित वृद्धा आश्रम के दो कमरों में वैकल्पिक बाल गृह की व्यवस्था की गई है। ऐसे में बाल अपराधों के लिये सरकार की ओर से बनाये जा रहे नियमों को लेकर शासन और प्रशासन के गंभीर प्रयासों का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
चमोली जिले में बाल गृह निर्माण के लिये तय मानकों के अनुरुप भूमि की अनुपलब्धता के चलते भवन निर्माण में दिक्कतें आ रही है। मामले में जिलाधिकारी की ओर से बाल गृह निर्माण के लिये कार्रवाई करने के निर्देश दिये गये हैं। जिस पर कार्रवाई की जा रही है।
धनंजय लिंगवाल, जिला प्रोबेशन अधिकारी, चमोली।
