गोपेश्वर/कर्णप्रयाग (चमोली)। चमोली जिले के महाविद्यालय गोपेश्वर और कर्णप्रयाग में शनिवार को गढ़भोज का आयोजन किया गया। गढ़भोज में छात्र-छात्राओं की ओर से विशेष तौर स्थानीय पोशाक पहनकर लाल भात, मंडुए की रोटी, राई की सब्जी, झंगोरे की खीर, चैंसा और काफली जैसे स्थानीय व्यंजन बनाकर परोसे गए।
गोपेश्वर महाविद्यालय में गृहविज्ञान विभाग की ओर से आयोजित गढ़भोज कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए प्राचार्य प्रो. कुलदीप सिंह नेगी ने कहा कि गढ़भोज दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य है कि स्थानीय एवं जैविक उत्पादों की तरफ एक बार फिर से लोगों में जागृति एवं विश्वास पैदा हो। गृह विज्ञान की प्राध्यापिका डॉ. रंजू बिष्ट ने कहा कि हमारे स्थानीय उत्पाद स्वाद एवं पौष्टिकता में आधुनिक भोजन से बेहतर हैं। गृह विज्ञान विभाग की प्रभारी डॉ. प्रियंका टम्टा ने कहा कि गढ़वाल एवं कुमाऊं क्षेत्र में पैदा होने वाले स्थानीय उत्पाद स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं और इसको बढ़ावा देने से स्थानीय लोगों को रोजगार के नए साधन भी पैदा हो सकते हैं। इस अवसर पर प्रो. चंद्रावती जोशी, डॉ. मनीष डंगवाल, डॉ. बीपी देवली, डॉ. डीएस नेगी, दीपा, सोनी, दीप्ति, सोनी, पूनम आदि उपस्थित थे।
वहीं दूसरी ओर महाविद्यालय कर्णप्रया में गढ़भोज दिवस के अवसर पर छात्राओं ने उत्तराखंडी पकवान बनाकर परोसे गये। प्राचार्य प्रो. केएल तलवाड़ ने बताया कि शनिवार को भूगोल विभाग की डा.नेहा तिवारी पाण्डेय की देख-रेख में छात्राओं ने कालेज में झंगोरे की खीर, चैंसा, रोटन, भांग की चटनी, झंगोरे का भात और कंडाली बनाकर एक सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया। उन्होंने कि उत्तराखंड की औषधियों गुणों से भरपूर फसलों से बनने वाले भोजन की जानकारी और स्वाद आज की नई पीढ़ी को अवश्य होनी चाहिए। इस प्रयास से हम अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता भी प्रकट कर रहे हैं, जिन्होंने विरासत में हमें यह फसलें और भोजन दिया है। व्यंजन बनाने में सपना, मेघालय, संतोषी, सुमन, साहिबा, किरन, मोनिका, निधि, शिवानी, मोनिका, सपना और सारिका का सहयोग रहा।
