posted on : October 20, 2021 5:33 pm

गोपेश्वर (चमोली)। सरकारी शिक्षा व्यवस्था को दूरस्थ गांवों में दूरस्त करने के सरकार के तमाम दावे जमीनी हकीकत में दावों के उलट साबित हो रह हैं। चमोली जिले में बीते पांच सालों में जहां प्राइमरी से लेकर इंटर तक एक भी नया विद्यालय ना ही खुला है और ना ही उच्चीकृत हुआ है, वहीं इसके उलट जिले में 67 विद्यालय कम छात्र संख्या के चलते बंद कर दिए गये है। ऐसे में शिक्षा विभाग के प्रवेशोत्सव के कार्यक्रम व सरकार के विद्यालयों में सीबीएसई पैटर्न पर पढाई के प्रयास महज दिखावा साबित हो रहे हैं।

चमोली जिले में बड़ी संख्या लोग ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करते हैं। इन ग्रामीण क्षेत्रों में निजी विद्यालय ना के बारबर मौजूद हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से सरकारी विद्यालयों पर निर्भर है। लेकिन सरकार की ओर से 15 नवम्बर 2018 को जारी शासनादेश के बाद जिले में 63 प्राथमिक व जूनियर और 5 इंटर स्तर के विद्यालयों को कम छात्र संख्या के चलते बंद कर दिया गया है। जबकि इससे पूर्व वर्ष 2014 से 2016 के मध्य जिले में 20 हाईस्कूल और 29 इंटरमीडिएट विद्यालयों का उच्चीकरण किया गया था। वहीं वर्ष 2017 के बाद जिले में न तो को नया प्राथमिक या जूनियर विद्यालय खोला गया है और न ही हाईस्कूल और इंटर स्तर पर विद्यालयों का उच्चीकरण किया गया है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा जैसी मूलभूत आवश्यकता की पूर्ति के बिना सरकार के पलायन रोकने के दावों का भी सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

 

राज्य की भौगोलिक स्थितियों को देखते विद्यलायों के बंद करने को लेकर 30 की छात्र संख्या वाले नियम में शिथिलता की गई है। ऐसे में जिन विद्यालयों की छात्र संख्या 10 से अधिक होगी उनका पुनः संचालन शुरु किया जाएगा। जिले में दो विद्यालयों को लेकर प्रस्ताव तैयार किया गया है। अन्य विद्यालयों को लेकर विभाग से योजना मांगी गई है।

महेंद्र भट्ट, बदरीनाथ विधायक।

 

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