गैरसैंण (चमोली)। एक फिर बार 108 आकस्मिक सेवा नवजात की किलकारी से गूंज उठा। माता 23 वर्षीय शांता देवी अपने जिगर के टुकड़े को देख कर जहां शारीरिक दर्द भूल कर मुस्कराती नजर आई। वहीं 108 वाहन में तैनाद डॉ. गौरव, फार्मासिस्ट दीपा व आशा कार्यकत्र्री पद्मा रावत सहित चालक नरेंद्र सिंह ने राहत की सांस ली। फिलहाल जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं, जिनको सीएचसी कर्णप्रयाग में भर्ती किया गया है।
गैरसैंण ब्लाक के घंडियाल से ग्रामीण पदम सिंह ने शुक्रवार को 108 वाहन को एमरजेंसी को सूचना दी, जिस पर तुरन्त कार्रवाई करते हुए आकस्मिक सेवा वाहन ने गांव से गर्भवती को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गैरसैंण पहुचाया। प्रसव वेदना से पीड़ित गर्भवती का प्रभारी चिकित्सक डॉ. अनिता ने जांच कर हायर सेंटर रेफर कर दिया। फार्मासिस्ट दीपा व आशा कार्यकत्र्री पद्मा के अनुसार नवजात के पांव बाहर नजर आ रहे थे, बच्चा उल्टा होने के चलते चिकित्सक ने ब्रीच बर्थ का रिस्क न लेते हुए गर्भवती को रैफर कर दिया। गैरसैंण-कर्णप्रयाग के बीच भटोली के समीप गर्भवती की हालत बिगड़ने लगी, जिस पर 108 में मौजूद चिकित्सक व फार्मासिस्ट ने सकुशल प्रसव करवाया। ब्रीच प्रैग्नेंन्सी को नार्मल प्रसव कराने में सफल रहे डॉ.गौरव ने बताया कि केस जटिल था किंतु जच्चा बच्चा का जीवन बचाना हमारी प्राथमिकता रही और प्रयास सफल रहा।
