गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले में पशुपालन विभाग के स्वीकृत पशु चिकित्सा अधिकारी ग्रेड एक और दो के स्वीकृत 33 पदों के सापेक्ष 26 की तैनाती की गई है। जबकि सात पद रिक्त हैं। लेकिन यहां तैनात 26 चिकित्सकों में से नौ को निदेशालय की ओर से अन्यत्र संबद्ध किया गया है। ऐसे में सीमांत जिले में पशुपालन को लेकर विभागीय अधिकारियों और शासन की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
जिले में पशुपालन विभाग की ओर से पशुपालकों को बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिये पशु चिकित्साधिकारी ग्रेड एक में 13 चिकित्सकों के पद स्वीकृति किये गये हैं। जिनमें से तीन पद लम्बे समय से रिक्त चल रहे हैं। लेकिन वहीं निदेशालय स्तर से तैनात 10 चिकित्सकों में से सात को अन्यत्र संबद्ध किया गया है। ऐसे ही पशु चिकित्साल अधिकारी ग्रेड दो के लिये सृजित 20 पदों के सापेक्ष जहां चार पद खाली पड़े हुए हैं। वहीं दो चिकित्सकों को अन्यत्र संबद्ध कर दिया गया है। ऐसे में सृजित पदों के सापेक्ष जिले में 26 चिकित्सकों की तैनाती में नौ को अन्यत्र संब; किया गया है। चिकित्सकों के अन्यत्र संबद्ध होने के चलते यहां पशुपालकों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही जिले में पशुधन प्रसार अधिकारी के सृजित 60 पदों के सापेक्ष 33 पद रिक्त पड़े हुए हैं। स्थानीय निवासी रविन्द्र सिंह, ज्वाला प्रसाद और लक्ष्मण का कहना है कि जहां सरकार की ओर पशुपालन, कुक्कूट पालन जैसे व्यवसाय के जरिये ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाकर पलायन पर रोक लगाने के दावे किये जा रहे हैं। वहीं चिकित्सकों की कमी पशुपालकों को निराश कर रही हैं।
जिले से अन्यत्र संबद्ध चिकित्साधिकारियों की कमी से हो रही दिक्कतों व रिक्त पदों पर तैनाती को लेकर निदेशालय से पत्राचार किया जा रहा है। निदेशालय स्तर से मामले में कार्रवाई की जानी है। यदि अन्यत्र संबद्ध चिकित्सकों को जिले में भेजा जाता है तो पशुपालकों तक योजनाओं के प्रसार में सुगमता होगी।
डा. शरत कुमार भंडारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, चमोली।
