posted on : June 6, 2021 6:43 pm

गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के निजमूला घाटी के नौ ग्रामी सभाओं को  को यातयात से जोड़ने वाली निजमूला-ईराणी सड़क पर बना पुल चार साल पूर्व आपदा में क्षतिग्रस्त हो गया था। जिसका अभी तक निर्माण नहीं हो पाया है। पीएमजीएसवाई की ओर से गदेरे में वैकल्पिक व्यवस्था कर वाहनों की आवाजाही करवाई जा रही है। लेकिन ग्रामीणों में आगामी 15 जून के बाद होने वाली बारिश के दौरान आवाजाही को लेकर चिंता बनी हुई है।

बता दें कि निजमूला घाटी के ईराणी, झींझी, गौंणा, पाणा, बौणा, भनाली, दुर्मी, पगना और धार कुमाला गांवों को यातायात से जोड़न वाली निजमूला-ईराणी सड़क पर वर्ष 2018 के जुलाई माह में भंगेडा गदेरे में निर्मित पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। जिसके बाद यहां वाहनों की आवजाही ठप होने पर पीएमजीएसवाई की ओर से यहां गदेरे में ह्यूम पाइप डालकर वाहनों की आवजाही की व्यवस्था करवाई गई। लेकिन वर्तमान तक यहां पुल का पुनर्निर्माण शुरु नहीं हो सका है। ग्राम प्रधान ईरणा मोहन सिंह नेगी, नरेंद्र सिंह, पूरण सिंह और माहेश्वरी देवी का कहना है कि सड़क पर पुल निर्माण न होने से यहां बरसात में बीते चार वर्षों से वाहनों की आवजाही जहां पूर्ण रुप से बंद रहती है। वहीं ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पैदल आवाजही कर रहे हैं। पूर्व जहां ग्रामीण बरसात के दौरान क्षतिग्रस्त पुल से पैदल आवजाही कर रहे थे। वहीं अब पीएमजीएसवाई की ओर से पुराने पुल की निलामी कर दी है। ऐसे में बरसता होने पर यहां पैदल आवाजाही का भी कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने मामले में जिला प्रशासन और बदरीनाथ विधायक से हस्तक्षेप कर पुल निर्माण की मांग उठाई है।

 

निजमूला-ईराणी सड़क पर भगेडा गदेरे में पुल निर्माण के लिये ३ करोड़ की डीपीआर भारत सरकार को स्वीकृति के लिये भेजी गई है। भारत सरकार से स्वीकृति मिलते ही पुल का निर्माण कार्य शुरु कर दिया जाएगा।

विकास बडोला, कनिष्ठ अभियंता, पीएमजीएसवाई, चमोली।

 

तीन जिलाध्यक्षों की का गृह क्षेत्र है निजमूला

निजमूला घाटी राज्य और केंद्र सरकार में सत्तारुढ़ भाजपा से सम्बंध रखने वाले जिलाध्यक्षों का गृह क्षेत्र है। घाटी से जहां भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर बिष्ट, चमोली जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष गजेंद्र रावत हैं। वहीं घाटी के दूरस्थ गांव के ग्राम प्रधान मोहन सिंह नेगी ग्राम प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष हैं। ऐेसे में चार वर्षों से क्षतिग्रस्त पुल का पुर्ननिर्माण न हो पाना सरकार की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।

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