गोपेश्वर (चमोली)। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि मैंने अनेक राज्यों का भ्रमण किया है। एससीएसटी भू कानून का अध्ययन किया। झारखंड जैसे राज्य का भी भ्रमण कर वहां के भू कानून को जाना है। एक ओर हम ग्लोबलाइजेसन की बात करते है वहीं दूसरी ओर किसी को किसी को प्रवेश नहीं देंगे। इस पर एक बढ़ी परिचर्चा किये जाने और गहराई से अध्ययन करने की आवश्यकता है।
अपने चमोली जिले के चार दिवसीय भ्रमण के दौरान उन्होंने रविवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि उन्होंने कहा कि मंदिर समिति देश की आजादी से पहले से ही सरकारी प्रक्रिया के तहत संचालित होता है। देवस्थानम बोर्ड उससे अलग नहीं है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जब सभी सुविधाऐं उपलब्ध हो जायेगी तो यहां तीर्थाटन बढ़ेगा ऐसे में इसका संचालन बोर्ड बनाकर किया जाना ही संभव है। उन्होंने कहा कि जो लोग इसका विरोध कर रहे है वे अभी तक इसके फायदे नहीं समझ पाये है आने वाले दस सालों के बाद उनको इसका लाभ का पता चल जायेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें यह कहने पर कोई संकोच नहीं है कि उत्तराखंड का आम आदमी पर्यावरण के प्रति काफी सजग है। उनकी इस सजगता से वे गदगद हो गये है। उन्होंने कहा कि यह वह भूमि है जहां पर लोगों पर्यावरण को बचाने के लिए चिपको आंदोलन चलाया था। कहा कि मैने अपने चार दिनों के भ्रमण के दौरान पाया कि लोग स्वतः स्फूर्त होकर वनों को बचाने के लिए आगे आ रहे है और पौध रोपण कर पर्यावरण को बचाने का संकल्प ले रहे है।
गैरसैण ग्रीष्म कालीन राजधानी के बारें में बोलते हुए उन्होंने कहा कि ग्रीष्म कालीन राजधानी की जो नींव उन्होंने डाली है उसे कोई अधूरा नहीं छोड़ सकता है। 25 करोड़ रुपये से 10 सालों में इसको विकसित करने के लिए उनके कार्यकाल में रखा गया था जिसमें से एक-दो करोड़ दे भी दिया गया है। जिससे वहां पर पेयजल लाइन बिछाने का कार्य शुरू हो गया है। इससे पहले पूर्व सीएम ने प्रेस क्लब की ओर से बिरही में रखे गये पौधरोपण कार्यक्रम में पौध रोपण किया। पत्रकारों की ओर से पूर्व सीएम का अंगवस्त्र पहना कर स्वागत भी किया गया। कार्यक्रम में भाजपा के जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह बिष्ट, रिपुदमन सिंह रावत, शशि भूषण मैठाणी, पत्रकार क्रांति भट्ट, शेखर रावत, राजा तिवारी, संदीप आर्यन, कृष्ण कुमार सेमवाल, पुष्कर चैधर, मनोज कुमार, सुरेंद्र गडिया आदि शामिल थे।
