गोपेश्वर (चमोली)। जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति लद्दाख़ में पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की एनएसए के तहत की गई गिरफ़्तारी की कड़ी निंदा की है। संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती ने वांगचुक की गिरफ्तारी को न केवल अलोकतांत्रिक और अन्यायपूर्ण बताया है बल्कि उस आवाज़ को दबाने का प्रयास है जो पांच वर्षों से लद्दाख़ की जनता की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं और पर्यावरणीय न्याय के लिए अहिंसक आंदोलन चला रही है।
सती ने कहा कि सोनम वांगचुक बीते 10 सितंबर से भूख हड़ताल कर जनता की चार न्यायोचित मांग लद्दाख़ को राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची में सम्मिलन, स्थानीयों को रोज़गार में प्राथमिकता और संसाधनों पर स्थानीय निर्णायक भूमिका आदि शामिल हैं। सरकार का इन वैध और संवैधानिक दावों पर संवाद करने के बजाय, उन्हें एनएसए जैसी दमनकारी धाराओं में कैद करना लोकतांत्रिक अधिकारों और संविधान पर सीधा प्रहार है। कहा कि हिमालयी क्षेत्र, पहले से ही विनाशकारी विकास मॉडल और जलवायु संकट की मार झेल रहा है। लद्दाख़ में जनता की आवाज़ को दबाना और संसाधनों को कॉर्पोरेट कंपनियों को सौंपना, केवल स्थानीय समाज ही नहीं बल्कि पूरे हिमालय और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए घातक है।
सती ने कहा कि यह स्पष्ट है कि सरकार जनता की न्यायपूर्ण मांगों को मानने की बजाय भय और दमन की राजनीति कर रही है। उन्होंने मांग की है कि सोनम वांगचुक को तुरंत और बिना शर्त रिहा किया जाए। सरकार को लद्दाख़ में चल रहे दमन को बंद कर अहिंसक आंदोलनरत जनता की चारों मांगों पर सार्थक संवाद और समाधान की दिशा में कदम उठाना चाहिए। कहा कि लद्दाख़ की आवाज़ को दबाना, पूरे हिमालय और भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं को दबाना है।
