गोपेश्वर (चमोली)। पदोन्नति में आरक्षण बहाली और ओबीसी को पदोन्नति में आरक्षण दिये जाने की मांग को लेकर रविवार को मूल निवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ की चमोली इकाई की ओर से एक सम्मेलन गोपेश्वर अंबेडकर भवन में आयोजित की गई।
सम्मेलन में मूल निवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ उत्तराखण्ड प्रदेश अध्यक्ष जंगी रडवाल ने कहा कि संविधान लागू होने के बाद से 2012 तक अनुसूचित जाति, जनजाति के कार्मिकों को पदोन्नति में आरक्षण का लाभ मिलता रहा है। इसके बावजूद इन्दु कुमार पांडेय और ईरशाद आयोग की रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखण्ड में अनुसूचित जाति का मात्र 11 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति को दो प्रतिशत को इसका लाभ मिला है वहीं दूसरी तरफ निदेशक पद, संयुक्त सचिव के उपर के पद जहां पर हर वर्ग के अधिकारों के लिए नीति बनती है, वहां पर प्रतिनिधित्व लगभग नगण्य है। ऐसे में उत्तराखण्ड सरकार की ओर से अनुसूचित जाति, जनजाति के राज्य की सेवाओं में प्रतिनिधित्व जाने बिना पदोन्नति में आरक्षण पर रोक लगाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि महासंघ उत्तराखण्ड सरकार से इन्दु कुमार एवं ईरशाद आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पदोन्नति में आरक्षण की बहाली की मांग करता है।
जिलाध्यक्ष चमोली महेंद्र शैलानी ने कहा कि नियुक्ति में आरक्षण का एक्ट न होने के कारण राज्य की सरकार ठेकेदारी में रमसा, उपनल आउटसोर्सिंग के माध्यम से आरक्षण के नियमों को ताक पर रखते हुए नियुक्तियां कर रहा है, जिसको रोकने के लिए महासंघ महामहिम राज्यपाल उत्तराखण्ड से नियुक्ति में आरक्षण के कानून बनाने की मांग करता है। बैठक में वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया है कि जब अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी वर्ग को भी नियुक्ति में आरक्षण, सामाजिक और शैक्षिक पिछड़े पन के आधार पर दिया जाता है तो अनुसूचित जाति, जनजाति की तरह ही ओबीसी को भी पदोन्नति में आरक्षण का कानून बनना चाहिए। इस मौके पर पीएल बैछवाल, राकेश टम्टा, हरीश टम्टा, रोमेश शाह, दिनेश शाह, कैलाश चन्द्रवाल, गरिमा कन्याल, मीना भिलंगवाल, मीना आगरी प्रभु दयाल, देवेन्द्र अग्निहोत्री, विनय कोहली, धनी आगरी, माखन पलेठा, अन्जू अग्निहोत्री, पुष्पा कोहली आदि मौजूद थे।
