गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले में बीते दिनों हुई बारिश कहीं आफत तो कंही राहत बन कर सामने आई है। जिले के आदिबदरी क्षेत्र में बारिश से वर्षों बाद प्राकृतिक जल स्रातों पुनर्जीवित हो उठे हैं। जिसे परिस्थितिकीय तंत्र के जानकार वन और कृषि कार्यों के लिये शुभ संकेत बता रहे हैं।
चमोली जिले में बीते दिनों हुई बारिश से जहां नदियों का जल स्तर बढ़ने से कई स्थानों पर खतरा पैदा हो गया है। वहीं जिले के आदिबदरी क्षेत्र में घलेटी, चिमाड़ा, मंगरी और रंडोली गदेरों में पांच वर्ष और गैरोली के कल्याणा गदेरे के जल स्रोत आठ वर्ष बाद पुर्नजीवित हुए हैं। स्थानीय निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता बसंत शाह का कहना है कि गदेरों के सूखने से क्षेत्र में हर वर्ष ग्रीष्मकाल में यहां प्राकृतिक जल स्रोत सूख जाते हैं। गदेरों में लम्बे अंतराल के बाद पुर्नजीवित होने से जल सम्पदा के समृद्ध होने की आस जगी है। हेमवंती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विवि के भूगोल विभाग के प्रोफेसर मोहन पंवार का कहना है कि मानसून में गदेरों में सामान्य रुप से जल धाराएं सक्रीय हो जाती हैं। लेकिन यदि जल विहीन हो चुके गेदेरों में जल स्रोत पुर्नजीवित हुए हैं। तो यह वन और कृषि के लिये बेहतर संकेत हैं। स्थानीय लोगों को पुर्नजीवित हो रहे जल स्रोतों के संरक्षण के लिये कार्य करने की आवश्यकता है।
