गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले में जहां निजी जल विद्युत परियोजनाएं विद्युत उत्पादन कर लाखों का मुनाफा कमा रही हैं। वहीं सरकारी परियोजनाओं के प्रति जन प्रतिनिधियों और सरकारी मशीनरी की लापरवाह रवैये के चलते इनका सुधारीकरण नहीं हो पा रहा है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के समय विद्युत उत्पादन करने वाली सरकारी विद्युत परियोजना चमोली में ठप पड़ी हुई है।
बता दें कि अविभाजित उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से चमोली के कोठियालसैंण में वर्ष 1955 में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद की ओर से दो मेगावाट की विद्युत परियोजना का निर्माण किया गया था। जिसके बाद परियोजना से 1995-96 तक विद्युत उत्पादन किया जाता रहा। जिसे गोपेश्वर नगर क्षेत्र को विद्युत आपूर्ति की जाती थी। लेकिन रख-रखाव होने के चलते 1996 में परियोजना से विद्युत उत्पादन बंद हो गया। जिसके बाद लम्बे समय तक सरकार और प्रशासन ने योजना की कोई सुध नहीं ली। जिस पर स्थानीय लोगों की ओर से मांग किये जाने पर वर्ष 2013 में परियोजना को उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम की ओर से उरेडा को हस्तांतरित किया गया। जिस पर उरेडा की ओर से परियोजना की क्षमता वृद्धि के साथ ही सुधारीकरण के लिये 22 करोड़ का वित्तीय प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को स्वीकृति के लिये भेजा गया। लेकिन वर्तमान तक प्रस्ताव को लेकर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। ऐसे में यहां सरकार की लाखों की परिसंपत्ति अब कबाड़ में तब्दील हो गई है।
कोठियालय से जल विद्युत परियोजना के सुधारीकरण का प्रस्ताव हस्तातंरण की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद केंद्र सरकार को भेजा गया है। वित्तीय स्वीकृति मिलते ही योजना को सुधारीकरण कार्य शुरु कर दिया जाएगा।
भूपाल सिंह कुंवर, अभियंता, उरेडा, चमोली।
