गोपेश्वर (चमोली)। आपदा के बाद अपना सब कुछ गंवा बैठे थराली के आपदा प्रभावित अभिभावकों को अब अपने पाल्यों के भविष्य की चिंता सताने लगी है। इस आपदा में जहां लोगों के घरौंदों को उजाड़ दिया है वहीं इन घरों में रहने वाले पीड़ितों के बच्चों का भविष्य भी चौपट कर दिया है। इस आपदा में बच्चों के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों से लेकर कापी किताब और ड्रेस भी आपदा की भेंट चढ़ गए है।
थराली की आपदा अभिभावकों के लिए ही नहीं अपितु बच्चों के लिए भी मुश्किल का सबब बन गई है। आपदा में सब कुछ गंवाने के चलत अब सड़क पर आ खड़े हो गए है। हालांकि प्रभावितों को राहत शिविरों में शरण दे दी गई है। इसके बावजूद भविष्य की पढ़ाई का संकट बच्चों के सामाने आ खड़ा हो गया है। आपदा में सब कुछ उजडने के बाद बच्चों के स्कूली प्रमाण पत्र, कापी किताब और स्कूल ड्रेस भी आपदा की भेंट चढ गई है। मकानों के उजडने अथवा मलवा भरने के कारण पूरी गृहस्थी एक तरह से उजड सी गई है। बच्चे भी राहत शिविरों में अपने अभिभावकों संग रह रहे है। इससे अब उनकी पढ़ाई लिखाई तो प्रभावित हो ही रही है साथ ही आपदा में मलवे की भेंट चढ़े उनके शैक्षिक प्रमाण पत्र बनाने का संकट भी अभिभावकों के सामने खड़ा हो जाएगा। हर बार देखने में आया है कि आपदा के बाद इस ओर किसी का भी ध्यान नहीं जाता है। इससे बेखबर आपदा पीड़ित बाद में बच्चों के सर्टिफिकेट बनाने के लिए दर-दर भटकते नजर आते है। अभिभावकों का कहना है आने वाले समय में ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए ताकि बच्चों को उनके शैक्षिक प्रमाण बनाने के लिए भटकना न पड़े।
