जोशीमठ (चमोली)। सीमावर्ती क्षेत्र नीती घाटी के लिए बनाये बनाये जा रहे राजमार्ग में एनजीटी के नियमों की अनदेखी से नीती गांव के पास बन रही कृतिम झील के कारण भविष्य के खतरे को देखते हुए भाकपा माले के राज्य कमेटी के सदस्य अतुल सती ने सर्वोच्च न्यायालय की ओर से गठित उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी के अध्यक्ष रवि चोपडा के माध्यम से सड़क एवं राजमार्ग मंत्रालय, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय को एक ज्ञापन भेज कर राजमार्ग के निर्माण में हो रही अनियमिता को रोकने और जिम्मेदार संस्था पर कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।
भाकपा माले के राज्य कमेटी के सदस्य अतुल सती का कहना है कि वे दो दिन पूर्व ही नीती गांव तक गये थे। इस दौरान उन्होंने राजमार्ग पर प्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण मानकों एवं सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की की अहवेलना को देखा है। उन्होंने बताया कि नीती गांव जो कि सीमा का अंतिम गांव है, से डेढ़ किलोमीटर पहले धौली गंगा में एक झील सी बन गयी है। यह झील सडक निर्माण के मलबे के सीधे नदी में डाले जाने के चलते बनी है। सीमा सड़क संगठन के एक कर्मचारी ने हमे यह झील पर्यटन आकर्षण के नजरिये से देखने को कहा। जो देखने मे सुंदर लग रही है। हिमालयी क्षेत्रों में ऐसी झील का बनना वैसे तो सामान्य परिघटना है, किन्तु यहां पर यह झील सड़क निर्माण के मलबे के चलते बनी है। इस झील के आगे किलोमीटरों तक यह मलवा सीधे नदी में गिराया हुआ दिखता है। सड़क निर्माण के बोल्डर पत्थर मिट्टी सब सीधे नदी में डंप किये गए हैं। जो भविष्य में नदी के प्राकृतिक बहाव को अवरुद्ध कर एक बड़ी आपदा का कारण बन सकता है। जैसा कि पिछले दिनों में देखने मे आया है सामान्य बरसात भी बड़ा रूप ले ले रही है। जिससे यह मलवा नदी में मिल कर बड़ी घटना का रूप ले सकता है। उन्होंने कहा कि यदि यहां निर्माण का यही तरीका गतिमान रहता है तो भविष्य में भी उस मार्ग के स्थायी होने की कोई सम्भावना नहीं दिखती। इस पूरे मार्ग में जगह-जगह भूस्खलन के नए नए क्षेत्र विकसित हो गए हैं। मलारी से आगे पूरा रास्ता चीड़ और देवदार के कटे हुए बेशकीमती वृक्षों से पटा हुआ है। उन्होंने इस मामले की जांच कर सड़क निर्माण कार्य में बरती जा रही अनियमिता के लिए जिम्मेदार संस्था पर कार्रवाई करने की मांग की है।
