गोपेश्वर (चमोली)। वामंपर्थी पार्टी भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी माक्सवादी और भाकपा (माले) ने दीवालीखाल में हुई पुलिस कार्रवाई की जांच एडीएम से करवाने पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि एडीएम से करवाना महज जांच का दिखावा करना है। उन्होंने मामले की जांच उच्च न्यायालय के सेवारत अथवा सेवानिवृत्त न्यायाधीश से करवाने की मांग उठाई है। वहीं उन्होंने पुलिस की ओर से पत्थराव के बाद लाठीचार्ज की बात का खंडन किया है। कहा कि पुलिस शक्ति का गलत प्रयोग कर आंदोलन को बदनाम करने का प्रयास कर रही है। जो सर्वथा गलत है।
माकपा के राज्य सचिव राजेंद्र नेगी और भाकपा (माले) के गढवाल सचिव इंद्रेश मैखुरी ने बुधवार को संयुक्त बयान जारी कर कहा कि पुलिस की ओर से पत्थराव के बाद लाठचार्ज की बात प्रचारित की जा रही है। जबकि विडियो में स्पष्टतौर पर दिख रहा है कि लाठीचार्ज के बाद भीड़ उग्र हुई। उन्होंने बताया मौके पर पुलिस और आंदोलनकारी आमने-सामने सटकर खड़े थे। जिस पर पुलिस की ओर से आंदोलनकारियों को धकेलते हुए लाठीचार्ज किया गया। साथ ही उन्होंने मामले की मजिस्ट्रीयल जांच एडीएम के करवाने के आदेशों को जांच के नाम पर खानापूर्ति बताया है। कहा कि यदि सरकार मामले की निष्पक्ष जांच की पक्षधर है तो सरकार को मामले की जांच उच्च न्यायायल के सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश से करवानी चाहिए।
