• बनभूलपुरा हिंसा में प्रशासन की लापरवाही, जल्दबाजी, निष्पक्षता और बल प्रयोग पर गंभीर सवाल
• नैनीताल के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक घटना के जिम्मेदार, तत्काल निलंबित करते हुए पद से हटाया जाय
• किसी प्रशासनिक अधिकारी से नहीं बल्कि घटना की न्यायिक जांच, उच्च न्यायालय के सेवारत न्यायाधीश से करवाई जाए।
हल्द्वानी। हल्द्वानी में 8 फरवरी को हुई हिंसा की इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटना उत्तराखंड के इतिहास में पहली बार हुई है। इतनी भीषण हिंसा की घटना में प्रथम दृष्टया प्रशासन की लापरवाही, जल्दबाजी, निष्पक्षता और बल प्रयोग करने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। अतः नैनीताल जिले के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को तत्काल निलंबित करते हुए पद से हटाया जाए। अचानक इतने बड़े पैमाने पर हिंसा का फैलना, हिंसा के कारणों और उसके होने की परिस्थिति की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की जरूरत है। इसलिए किसी प्रशासनिक अधिकारी से नहीं बल्कि घटना की न्यायिक जांच, उच्च न्यायालय के सेवारत न्यायाधीश से करवाई जाए।
भीषण हिंसा की इस घटना से निपटने की नाम पर जिस तरह घरों में घुसकर महिला बच्चों के साथ तक जिस तरह की भीषण पुलिसिया प्रतिहिंसा हो रही है उस पर तत्काल रोक लगाई जाए। इस घटना से निपटने के नाम पर होने वाली हर कार्यवाही कानून और संविधान के दायरे के अंदर होनी चाहिए।
राज्य सरकार और प्रशासन की कोई भी कार्यवाही संविधान और कानून के दायरे में ही हो। कानून का पालन कराने वाले खुद भी कानून का पालन करें।
अतिक्रमण हटाओ अभियान के नाम पर पिछले एक साल से चल रही कार्यवाहियां गंभीर सवालों के घेरे में हैं। बिना नोटिस के कार्यवाही से लेकर पक्षपातपूर्ण और गैर कानूनी कार्यवाही तक की घटनाएँ सामने आई हैं। जिस प्रकरण में हल्द्वानी में हिंसा हुई है, वह मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और उसकी अगली सुनवाई 14 फरवरी 2024 को है। इसके बावजूद ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की गई। इस तरह की निरंकुश कार्यवाही पर रोक लगनी चाहिए। किसी भी कार्यवाही को करते हुए पुनर्वास, नोटिस, सुनवाई और संवेदनशीलता का ध्यान रखा जाना चाहिए। किसी को भी बेघर नहीं किया जाना चाहिए।
