गोपेश्वर (चमोली)। भू-धंसाव की मार झेल रहे जोशीमठ के ट्रीटमेंट की कवायद के तहत नगर क्षेत्र में सीवरेज और ड्रेनेज के कार्य चरणबद्ध ढंग से प्रारंभ होंगे। स्थानीय लोगों से संवाद कर ही निर्माण कार्य प्रारंभ होंगे।
जिलाधिकारी संदीप तिवारी की अध्यक्षता में ज्योतिर्मठ नगर क्षेत्र के पुनर्निर्माण एवं सुरक्षा कार्यों के तहत जल निकासी एवं सीवरेज प्रणाली हेतु तैयार विस्तृत डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) की समीक्षा बैठक में ट्रीटमेंट को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
डीएम तिवारी ने बैठक में निर्देश दिए कि ज्योतिर्मठ क्षेत्र में जल निकासी, सीवरेज कार्य एवं सुरक्षात्मक निर्माण कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व भू-वैज्ञानिकों एवं संबंधित विशेषज्ञों की रिपोर्ट का अवलोकन करना होगा। उन्होंने कार्यदायी संस्था उत्तराखंड शहरी क्षेत्र विकास एजेंसी (यूयूएसडीए) को पीडब्ल्यूडी विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर योजनाबद्ध एवं चरणबद्ध तरीके से कार्य करने के निर्देश दिए। इससे एक विभाग दूसरे विभाग के कार्यों में बाधा नहीं बनेगा। उनका कहना था कि सीवरेज और ड्रेनेज कार्य से प्रभावित परिवारों, स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों एवं विभिन्न स्टेकहोल्डरों से संवाद स्थापित करना होगा। ज्योर्तिमठ में हॉलिस्टिक अप्रोच के साथ सीवरेज और ड्रेनेज के कार्य करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने एसडीएम ज्योतिर्मठ को आर्मी, आइटीबीपी और बीआरओ के साथ भी कार्यदायी संस्था यूयूएसडीए की मीटिंग कराने को कहा।
यूयूएसडीए के प्रोजेक्ट मैनेजर जतिन सिंह सैनी ने बताया कि ज्योतिर्मठ नगर क्षेत्र में जल निकासी, पेयजल आपूर्ति और सीवरेज की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत डीपीआर तैयार की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्व में कार्यदायी संस्था जल निगम द्वारा तैयार डीपीआर में एडवांस स्टडीज और स्थल निरीक्षण जोड़कर इसे और अधिक सुदृढ़ रूप दिया गया है।
इस अवसर पर यूयूएसडीए के प्रोग्राम डायरेक्टर अभिषेक रुहेला, परियोजना निदेशक आनंद सिंह भाकुनी ज्योतिर्मठ के एसडीएम चंद्रशेखर वशिष्ठ, पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता राजेश चंद्रा तथा यूयूएसडीए टीम के अन्य सहायक सदस्य मौजूद रहे।
