गोपेश्वर (चमोली)। उत्तराखंड के चारधामों के प्रबंधन के लिये बनाये गये देवस्थानम बोर्ड पर पुनर्विचार के साथ सरकार को कार्य करना चाहिए। बोर्ड में गठन में हक-हकूकधारियों के अधिकारियों और आस्था को विषय को लेकर भी ध्यान रखना चाहिए। यह बात गढवाल सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने शनिवार को गोपेश्वर में पत्रकारों से बातचीत करते कही।
गढ़वाल सांसद ने कहा कि सरकार के मुख्यमंत्री के रुप में भी उन्होंने देवस्थानम बोर्ड को लेकर पुर्नविचार करने और हक-हकूकधारियों के अधिकारों के संरक्षण की बात कही थी। जिस पर अभी भी कायम हूं, वहीं उन्होंने भारत-तिब्बत सीमा क्षेत्र की तमक में बाधित सड़क को लेकर भूगर्भीय सर्वेक्षण करवा कर मार्ग को सुचारु करने के विकल्पों पर विचार करने की भी बात कही है। गोपेश्वर हल्दापानी मोहल्ले में हो रहे भूस्खलन को लेकर सिंचाई विभाग की ओर शासन को भेजे गये प्रस्ताव को लेकर शासन में वार्ता कर शीघ्र कार्रवाई का भी उन्होंने भरोसा दिलाया है। वहीं संसद में घाट-थराली सड़क निर्माण को लेकर उठाये सवाल पर भी उन्होंने कहा केंद्र सरकार की ओर से सड़क को सकारात्मक रुख अपनाया जा रहा है। बताया कि सड़क निर्माण से थराली और घाट क्षेत्र में पर्यटन विकास के साथ ही गढवाल और कुमाऊं मंडल की सुगम आवाजाही भी हो सकेगी। इस मौके पर पार्टी के जिलाध्यक्ष रघुवीर बिष्ट, महामंत्री नवल भट्ट, समीर मिश्रा, मीडिया प्रभारी महावीर रावत, डीसीबी अध्यक्ष गजेंद्र बिष्ट, राकेश कुमार डिमरी, हरक सिंह नेगी आदि मौजूद थे।
