गोपेश्वर (चमोली)। उत्तराखंड की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज होने लगी है। कांग्रेस और भाजपा के इतर अब कई नामी और प्रभावशाली चेहरे उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) की ओर रुख कर रहे हैं। जनसरोकारों से जुड़े सवालों को लेकर यूकेडी की लगातार सक्रियता और गांव-गांव तक पहुंच के बीच कद्दावर लोगों की बढ़ती आमद ने पार्टी की चुनावी संभावनाओं को बल दिया है।
पिछले कुछ समय से यूकेडी रोजगार, पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, जमीन और पहाड़ के संसाधनों पर स्थानीय लोगों के अधिकार जैसे मुद्दों को लेकर लगातार आवाज उठा रही है। पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव पहुंचकर लोगों से संवाद कर रहे हैं और स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता से उठा रहे हैं। इसी बीच सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े कई प्रभावशाली लोगों का यूकेडी की ओर झुकाव पार्टी के लिए अहम माना जा रहा है।
यूकेडी के बढ़ते जनसंपर्क अभियान और नए चेहरों की सक्रियता से कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी मुकाबले में तीसरे विकल्प की चर्चा भी तेज हुई है। हालांकि, इन चेहरों को संगठन के साथ जोड़कर लंबे समय तक सक्रिय रखना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती होगी। चुनाव नजदीक आने के साथ ही कई क्षेत्रों में टिकट के दावेदार भी सामने आने की संभावना है।
सबसे बड़ी नजर अब उम्मीदवारों के चयन पर रहेगी। एक ही विधानसभा क्षेत्र में कई मजबूत दावेदार सामने आने की स्थिति में यूकेडी को संगठनात्मक संतुलन बनाते हुए सर्वसम्मति से प्रत्याशी तय करने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। टिकट वितरण में किसी एक चेहरे के पक्ष में फैसला होने पर दूसरे दावेदारों को साथ रखना भी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण होगा।
राजनीतिक तौर पर यूकेडी के सामने अपनी बढ़ती सक्रियता को चुनावी ताकत में बदलने की चुनौती है। गांवों में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को उठाने के साथ यदि पार्टी बूथ स्तर तक मजबूत संगठन खड़ा करने में सफल रहती है तो कांग्रेस और भाजपा के सामने कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है।
फिलहाल कद्दावर चेहरों की यूकेडी की ओर बढ़ती आमद ने पार्टी के भीतर नई उम्मीदें जरूर जगाई हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यूकेडी इन चेहरों को संगठन में किस जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ाती है और आगामी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारी तय करते समय किस तरह सभी दावेदारों के बीच संतुलन साधती है। यही तय करेगा कि नए चेहरों की आमद यूकेडी के लिए महज संगठन विस्तार तक सीमित रहती है या वास्तव में चुनावी समीकरण बदलने में कामयाब होती है।
