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posted on : June 16, 2026 4:56 pm
Independence Day 2026 Greetings

गोपेश्वर (चमोली)। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ ही पहाड़ के मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आने लगे हैं। राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने की मांग, पलायन, बेरोजगारी, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, सड़क संपर्क, भू-कानून और मूल निवास, महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों की प्रमुख चिंताएं बने हुए हैं। माना जा रहा है कि आगामी चुनाव में इन्हीं मुद्दों पर राजनीतिक दलों की परीक्षा होगी।

पर्वतीय क्षेत्रों में लंबे समय से गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने की मांग उठती रही है। राज्य आंदोलनकारियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों का मानना है कि पर्वतीय राज्य की राजधानी पहाड़ में होने से विकास का संतुलन बनेगा और पहाड़ी क्षेत्रों की समस्याओं को प्राथमिकता मिलेगी। हालांकि गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा मिल चुका है, लेकिन स्थाई राजधानी का मुद्दा मौजूदा दौर में भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। इसके साथ ही पलायन पहाड़ का सबसे बड़ा संकट बना हुआ है। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में हजारों युवा गांव छोड़कर शहरों की ओर जा रहे हैं। कई गांवों में आबादी लगातार घट रही है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचा प्रभावित हो रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी चुनावी बहस का प्रमुख विषय बन सकती है। पर्वतीय जिलों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। सड़क संपर्क, भूस्खलन और बरसात के दौरान मार्गों के बार-बार बाधित होने की समस्या भी जनता के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है।

युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और स्वरोजगार के सीमित अवसर भी चुनावी मुद्दों में शामिल रहेंगे। पर्यटन, कृषि, बागवानी और स्थानीय उत्पादों पर आधारित रोजगार सृजन की मांग लगातार उठ रही है। इसके अलावा शिक्षा, पेयजल, आपदा प्रबंधन और पुनर्वास के मुद्दे भी राजनीतिक दलों के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल हो सकते हैं।

भू-कानून, मूल निवास और स्थानीय संसाधनों पर अधिकार जैसे विषय भी पहाड़ में संवेदनशील मुद्दे माने जाते हैं। वहीं चारधाम यात्रा से जुड़े क्षेत्रों में स्थानीय व्यापारियों और युवाओं को मिलने वाले लाभ तथा यात्रा प्रबंधन पर भी चुनावी चर्चा होने की संभावना है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बदरीनाथ, केदारनाथ, कर्णप्रयाग, थराली, गंगोत्री, यमुनोत्री, श्रीनगर, पौड़ी, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और चम्पावत जैसी सीटों पर इन मुद्दों का सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में 2027 का चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन की लड़ाई नहीं, बल्कि पहाड़ की पहचान, विकास और भविष्य से जुड़े सवालों का भी चुनाव माना जा रहा है।

 

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