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posted on : June 29, 2026 4:17 pm

गोपेश्वर (चमोली)। उत्तराखंड भोजनमाता संगठन के बैनर तले सोमवार को भोजनमाताओं ने अपनी मांगों को लेकर  मुख्य शिक्षाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन कर धरना दिया। धरने के माध्यम से एक ज्ञापन मुख्यमंत्री को भेजा गया। 

प्रदर्शन के दौरान भोजनमाताओं ने कहा कि मध्याह्न भोजन योजना में कार्यरत अधिकांश महिलाएं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती हैं। वर्षों से सेवाएं देने के बावजूद उन्हें न तो राज्य कर्मचारी का दर्जा मिला है और न ही न्यूनतम वेतन। उनका कहना था कि प्रदेश में छात्र संख्या कम होने के कारण कई विद्यालय बंद हो चुके हैं या बंद होने की स्थिति में हैं। ऐसे विद्यालयों के शिक्षकों को अन्य स्कूलों में समायोजित कर दिया जाता है, जबकि भोजनमाताओं की सेवाएं समाप्त कर दी जाती है। इससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

भोजनमाताओं ने मांग की कि उन्हें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा देकर राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए। जब तक यह संभव नहीं होता, तब तक उन्हें प्रतिमाह 26 हजार रुपये न्यूनतम वेतन दिया जाए। विद्यालयों के बंद होने या छात्र संख्या कम होने की स्थिति में शिक्षकों की तरह अन्य विद्यालयों में समायोजित किया जाए।

ज्ञापन में भविष्य निधि (पीएफ), ईएसआई, सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी एवं पेंशन की सुविधा उपलब्ध कराने की भी मांग की गई। इसके अलावा भोजन बनाने के अतिरिक्त कराए जाने वाले अन्य कार्यों का अलग से भुगतान किए जाने और विद्यालयों में भोजन बनाने के लिए गैस सिलेंडर अथवा जलावन की व्यवस्था विभाग की ओर से सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई। भोजनमाताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगी।

इस दौरान भोजनमाता संगठन की जिलाध्यक्ष उर्मिला, आशा नेगी, कमला देवी, लीला देवी, विमला देवी, माहेश्वरी देवी, विरमा देवी, मुन्नी देवी, गुड्डी देवी, मोनिका देवी आदि मौजूद रही।

 

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