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posted on : November 21, 2020 9:53 pm
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ऋषिकेश : अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में वर्ल्ड एंटीमाइक्रोबेल एवरनैस वीक के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न सर्जरी एवं सामान्य चिकित्सा विभागों के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने एंटीबायोटिक दवाओं के इस्तेमाल के लिए निर्धारित मानकों का खयाल रखने पर जोर दिया। व्याख्यानमाला के माध्यम से उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी बीमारी में बिना विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह से एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग नहीं करें, ऐसा करने पर एंटीबायोटिक जीवन को संकट में डाल सकता है। निदेशक एम्स पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत की देखरेख में आयोजित सप्ताहव्यापी जनजागरुकता कार्यक्रम के अंतर्गत एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग व सही इस्तेमाल पर व्याख्यान दिए।

संस्थान की जनरल मेडिसिन विभागाध्यक्ष एडिशनल प्रोफेसर मीनाक्षी धर ने बताया कि एंटीबायोटिक का उपयोग किसी भी छोटी बीमारी के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि इसी तरह से इसका इस्तेमाल होता है तो इससे किसी एक व्यक्ति को ही नहीं बल्कि सभी लोगों को इसका नुकसान उठाना पड़ता है। लिहाजा कोई भी दवा लेने से पहले हमें विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह अवश्य लेनी चाहिए जिससे हम एंटीबायोटिक दवाओं के नुकसान से बच सकते हैं।

न्यूरो सर्जरी के एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डा. रजनीश कुमार अरोड़ा ने बताया कि हमारे डिपार्टमेंट में एंटीबायोटिक के कम से कम उपयोग में लाने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने बताया कि सामान्य बीमारियों में एंटीबायोटिक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, बल्कि पहले रोग की संपूर्ण जांच करानी चाहिए। एंटीबायोटिक देने की आवश्यकता पड़ती है तो उसे निर्धारित समयविधि तक ही दिया जाना चाहिए साथ ही इसके सही संकेत होने पर ही दिया जाना चाहिए।

कॉर्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर भानु दुग्गल ने कहा कि कोविड19 को लेकर उपयोग में लाए जाने वाले एंटीबायोटिक पर जानकारी दी। बताया कि कोविड के 80 फीसदी लोग वायरल वायरस से ग्रसित हैं, वैक्टिरिया से नहीं। जबकि 6 से 7 फीसदी मरीजों में ही वैक्टिरिया का संक्रमण पाया जाता है, लिहाजा सभी मरीजों को एंटीबायोटिक दिया जाना गलत है, चिकित्सक को वैक्टिरिया वाले पेशेंट को ही एंटीबायोटिक देनी चाहिए सामान्य वायरल से ग्रसित मरीजों को नहीं।

उन्होंने कहा कि एंटीबायोटिक दवा सोच समझकर दी जानी चाहिए और इसे देते समय डब्ल्यूएचओ की चेतावनी का खयाल रखा जाना चाहिए,जिसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आगाह किया है कि एंटीबायोटिक का बेवजह इस्तेमाल व प्रतिरोधक क्षमता होने की वजह से वर्ष 2030 तक 10 मिलियन तक लोग अपनी जान गंवा सकते हैं। बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष एंड एडिशनल प्रोफेसर डा. विशाल मागो ने बताया कि एंटीबायोटिक का इस्तेमाल ठीक प्रकार से नहीं हो रहा है, जो भी एंटीबायोटिक ली जानी चाहिए वह चिकित्सक की सलाह पर ही ली जानी चाहिए।

नेफ्रोलॉजी विभाग के असिस्टेंड प्रोफेसर डॉ. गौरव शेखर शर्मा ने बताया कि गुर्दे की बीमारियों में बहुत अधिक एंटीबायोटिक देने से हमारे गुर्दों पर दुष्प्रभाव पड़ता है,लिहाजा एंटीबायोटिक का इस्तेमाल ध्यान पूर्वक किया जाना चाहिए और इसे लेने से पूर्व टेस्ट डोज देनी जरुरी है। जिससे पता लगाया जा सके कि मरीज के लिए सही एंटीबायोटिक कौन सा है। इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजक डॉ. पीके पंडा, डीन कॉलेज ऑफ नर्सिंग प्रोफेसर सुरेश कुमार शर्मा,असिस्टेंट प्रोफेसर मनीष शर्मा, डॉ. राखी मिश्रा, कॉलेज ऑफ नर्सिंग की ट्यूटर मिस प्रिया शर्मा, मिस हेमलता आदि मौजूद थे।

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