गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के जोशीमठ ब्लाॅक के उर्गम घाटी के तल्ला बडगिंडा गावं के 44 आपदा प्रभावित परिवारों का आठ वर्षों बाद भी पुनर्वास न होने के चलते खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं। बुधवार को ग्रामीणों ने जिलाधिकारी हिमांशु खुराना से मुलाकात कर शीघ्र प्रभावित परिवारों पुनर्वास की गुहार लगाई है। ग्रामीणों का कहना है कि पुर्नवास की श्रेणी में शामिल होने और जन प्रतिनिधियों की ओर स्थलीय निरीक्षण के बाद भी पुनर्वास प्रक्रिया शुरु नहीं हो पाई है। जिसके चलते ग्रामीण मजबूरन दुर्घटनाओं को न्यौता देते गांव में परिवार के साथ जीने को मजबूर हैं।
बता दें कि वर्ष 2013 की आपदा के दौरान उर्गम घाटी के तल्ला बडगिंडा गावं में कल्प गंगा और हिरणावती नदी के उफनाने से गांव के 130 परिवार प्रभावित हो गये थे। जिसे बाद प्रशासन की ओर से की गई भूगर्भीय सर्वे में गांव के 44 अनुसूचित जाति के परिवारों के पुर्नवास की बात कही गई थी। जिसके बाद से ग्रामीण लगातार प्रशासन और जन प्रतिनिधियों से पुर्नवास की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों की ओर से पुर्नवास के लिये अपनी नाप भूमि के राजस्व अभिलेखों की जांच भी करवा ली गई है। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के चलते वर्तमान तक पुर्नवास की प्रक्रिया शुरु नहीं हो सकी है। ग्राम प्रधान मिंकल देवी और ममंद अध्यक्ष सरस्वती देवी का कहना है कि गांव में हो रहे भूस्खलन के चलते बारिश होने पर ग्रामीणों को बच्चों के साथ सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ता है। ऐसे में प्रशासन की लापरवाही को लेकर ग्रामीणों में खासा आक्रोश बना हुआ है। उन्होंने 10 दिनों के भीतर मामले में सकारात्मक कार्रवाई न किये जाने पर आंदोलन शुरु करने की चेतावनी दी है। इस मौके पर जिला पंचायत सदस्य सूरज कुमार सैलानी, गोविंद लाल, रणजीत, कुशल, अभिजीत प्रकाश और कृष्णा आदि मौजूद थे।
