घाट (चमोली)। एक कहावत है कि जहां चाह वहां राह और इस कहावत को चरित्रार्थ कर दिखाया है वादुक गांव की 45 वर्षीय रूकमा देवी ने। जो जड़ी बूटी की खेती कर स्थानीय महिलाओं को एक नई राह दिखा रही है। रुकमा देवी जड़ी बूटी की खेती कर प्रतिवर्ष 60 हजार से 1 लाख तक आय कमा रही है।
चमोली जिले के घाट ब्लॉक के वादुक गांव में रुकमा देवी ने अपने पिता की 50 नाली भूमि पर 2003 में जड़ी-बूटी उत्पादन का कार्य शुरु किया गया। लेकिन तकनीकी जानकारी न होने के चलते 2007 तक वे उत्पादित की जड़ी का विपणन कर तीन वर्ष के अंतराल में 25 हजार की तक आय प्राप्त हो पायी। जिसके बाद हैप्रेक श्रीनगर के सम्पर्क में आने के बाद 2015 में उन्होंने जड़ी-बूटी की पौधों का विपणन कार्य शुरु किया। जिससे प्रतिवर्ष रुकमा देवी को 60 हजार से 1 लाख तक की आय होने लगी। ऐसे में अब उन्होंने जड़ी-बूटी उत्पादन को रोजगार के रुप में नियमित रुप से शुरु कर दिया। रुकमा को मिल रही कामयाबी को देख वर्ष 2018 से गांव के अन्य छह काश्तकारों की ओर से भी जड़ी-बूटी के पौध तैयार की जा रही है। रुकमा देवी का कहना है कि जड़ी-बूटी उत्पादन में ग्रामीण अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन विपणन की सही जानकारी न मिलने के चलते काश्तकार शुरुआत में हतोत्साहित हो जाते हैं। जिसके लिये सरकार को विपणन व्यवस्था को लेकर भी जड़ी-बूटी काश्तकारों को जानकारी और अवसर प्रदान करने चाहिए। जिससे ग्रामीण गांवों में रहकर अच्छी आय प्राप्त कर सकें। जिससे गांवों से हो रहे पलायन पर भी प्रभावी रोक लग सकेगी।
चमोली जिले में घाट और देवाल में बड़े पैमान काश्तकारों की ओर से जड़ी-बूटी का कृषिकरण कार्य किया जा रहा है। वहीं थराली ब्लॉक में अब काश्तकारों की ओर से जड़ी-बूटी उत्पादन को लेकर रुचि बढ रही है। जल्द ही थराली ब्लॉक में भी काश्तकारों को प्रशिक्षण देकर जड़ी-बूटी कृषिकरण के लिये तैयार किया जाएगा।
डा. विजयकान्त, पुरोहित, हैप्रेक, श्रीनगर।
