गोपेश्वर (चमोली)। विभिन्न राजनैतिक व गैर राजनैतिक संगठनों की ओर से शनिवार को प्रधानमंत्री व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेज कर ऋषिकेश के इंडियन ड्रग्स एंड फार्मासूटिकल्स लिमिटेड (आईडीपीएल) के कारख़ाना को पुनर्जीवित किये जाने की मांग की है। ताकि कोरोना जैसे संकट के काल में उसका लाभ देश की जनता को मिल सके।
उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट, भाकपा के राज्य सचिव समर भंडारी, माकपा के राज्य सचिव राजेंद्र सिंह नेगी, भाकपा माले के गढ़वाल सचिव इंद्रेश मैखुरी, उत्तराखंड महिला मंच की निर्मला बिष्ट, उत्तराखंड पीपल्स फोरम के संयोजक जयकृत कांडपाल का कहना है कि देश और उत्तराखंड इस समय कोरोना की दूसरी लहर का तीव्र प्रहार झेल रहे हैं। ऐसे में हमारे सामने यह चुनौती है कि दवाई, ऑक्सीजन और अन्य चिकित्सीय सामग्री कैसे पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो और लोगों तक पहुंचे। उनका कहना है कि उत्तराखंड के ऋषिकेश में इंडियन ड्रग्स एंड फार्मासूटिकल्स लिमिटेड (आईडीपीएल) का कारख़ाना है। यह केंद्र सरकार का उपक्रम है, जिसे बरसों पहले बीमार घोषित कर दिया गया है। 1961 में स्थापित आईडीपीएल की अतीत में जीवन रक्षक दवाओं के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने और आयात पर निर्भरता कम करने में बेहद जबरदस्त भूमिका रही है। मलेरिया रोधी क्लोरोक्वीन, ओआरएस और परिवार नियोजन की गोली माला डी आदि का निर्माता आईडीपीएल रहा है। 1994 के प्लेग में टेट्रासाइक्लीन की आपूर्ति के जरिये आईडीपीएल ने इसके रोकथाम में बेहद प्रभावी भूमिका निभाई थी।
उन्होंने कहा कि बेहद शानदार अतीत वाले आईडीपीएल का कारख़ाना गुड़गांव, हैदराबाद आदि के साथ ही ऋषिकेश में भी है। ऋषिकेश का कारख़ाना अब अपने अतीत की छाया बन कर दम तोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब देश को जीवन रक्षक दवाओं, ऑक्सीजन और कोरोना के टीके की अत्याधिक आवश्यकता है, केंद्र सरकार को चाहिए कि आईडीपीएल ऋषिकेश को पुनर्जीवित करके, उसे इन सब के निर्माण कार्य में लगाया जाय। हाल में डीआरडीओ के सहयोग से आईडीपीएल ऋषिकेश में पांच सौ बेड का अस्थायी कोविड केयर सेंटर शुरू किया गया है। यह तात्कालिक उपयोग हो सकता है, लेकिन आईडीपीएल ऋषिकेश का सही उपयोग यही होगा कि उसे दवा, ऑक्सीजन और टीके के निर्माण में तत्काल लगाया जाये। वर्तमान महामारी के समय में तो ऐसा किया जाना नितांत आवश्यक है। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस प्रकरण में त्वरित निर्णय लिये जाने की मांग की है साथ ही उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री से इस मुद्दे पर चर्चा किये जाने के लिए समय दिए जाने की भी मांग की है।
