- कलेक्ट्रेट परिसर में स्वयं सहायता समूहों ने लगाए स्टॉल
- मिट्टी के दीये, पारंपरिक मूर्तियों व घरेलू उत्पादों की बिक्री से ग्रामीण महिलाओं को मिला बाजार
गोपेश्वर (चमोली)। इस दीपावली बाजार में स्थानीय उत्पादों की चमक बढ़ाने की पहल शुरू हो गई है। पहाड़ की मिट्टी से बने दीये, हाथों से तैयार सजावटी मूर्तियां और घरेलू उपयोग के उत्पाद अब सीधे ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं। चमोली जिला मुख्यालय गोपेश्वर कलेक्ट्रेट परिसर में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने स्टॉल लगाकर स्थानीय उत्पादों को बाजार में उतारा है। इस पहल से जहां पहाड़ी हुनर और पारंपरिक उत्पादों को पहचान मिल रही है, वहीं ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को भी सहारा मिल रहा है।
विकासखंड दशोली के हरियाली क्लस्टर देवर खडोरा से जुड़ी महिलाओं ने दीपावली के मद्देनजर ये स्टॉल लगाए हैं। बजरंगबली स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने मिट्टी के आकर्षक दीये और मूर्तियां तैयार की हैं। हिलांस और भवानी स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद भी बिक्री के लिए उपलब्ध हैं, वहीं देवभूमि स्वयं सहायता समूह की अंजू राणा सहित अन्य महिलाएं मिट्टी के दीये और घरेलू उपयोग की वस्तुएं लेकर पहुंची हैं।
इन उत्पादों की खासियत यह है कि इन्हें स्थानीय स्तर पर महिलाओं ने अपने हाथों से तैयार किया है। पारंपरिक कला, स्थानीय संसाधनों और रचनात्मकता से तैयार इन वस्तुओं को दीपावली के बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन मिलने के साथ महिलाओं को अपनी मेहनत का सीधा लाभ मिल सकेगा।
ग्रामोत्थान परियोजना (रीप) और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को स्वरोजगार, उद्यमिता और विपणन से जोड़ा जा रहा है। कलेक्ट्रेट परिसर में लगाए गए स्टॉल इसी प्रयास का हिस्सा हैं, जहां ग्रामीण महिलाएं अपने उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री कर रही हैं।
