गोपेश्वर (चमोली)। प्रसिद्ध समाजसेवी एवं चिपको आंदोलन की मातृ संस्था दशोली ग्राम स्वराज्य मंडल के पूर्व मंत्री भूपाल सिंह नेगी की रविवार को देहरादून में मृत्यु गई। सोमवार को उनकी मृत्यु पर पर्यावरण विद् चंडी प्रसाद भट्ट समेत अनेक समाजसेवियों व पर्यावरण संरक्षण से जुडे लोगों ने शोक संवेदना व्यक्त की है।
साठ साल की समाजिक जीवन के दौरान भूपाल सिंह नेगी ने शराबबंदी आंदोलन, ग्रामदान, वन आंदोलन और अलकनंदा घाटी में हरियाली लाने के लिए महत्पूर्ण भूमिका निभायी थी। मृत्यु से कुछ समय पूर्व ही उन्होंने दशोली ग्राम स्वराज्य मंडल के मंत्री पद से स्वैच्छिक त्यागपत्र दिया था और देहरादून में अपने बेटे के साथ रह रहे थे। उनकी मृत्यु पर कई सामाजिक संगठनों ने शोक व्यक्त किया।
जोशीमठ और दशोली विकास खण्ड के दर्जनों गांवों में वन संरक्षण के कार्याे के लिए भूपाल सिंह नेगी को याद किया जाता है। 82 वर्ष की उम्र के बाबजूद भी वे सामाजिक कार्याे में सक्रिय थे। उन्हें कई संगठनों की ओर से पुरूस्कृत भी किया गया था। गांधी शताब्दी वर्ष के मौके पर उन्हें प्रतिष्ठित गांधी-150 सम्मान से भी सम्मानित किया गया था। वे कई सामाजिक संगठनों से जुड़े थे। सीपी भट्ट पर्यावरण एवं विकास केन्द्र के संस्थापक न्यासी होने के साथ-साथ उन्होंने शुरूआत में बेमरू गांव के प्रधान के रूप में भी गांधी जी के ग्राम विकास की परिकल्पना को साकार किया था। उनकी मृत्यु पर प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता चण्डी प्रसाद भट्ट, पेड़ वाले गुरूजी धनसिंह घरिया, मंगला कोठियाल, सर्वोदयी कार्यकर्ता मुरारी लाल आदि ने अपनी शोक संवेदना व्यक्त की है।
