थराली/देवाल (चमोली)। मंत्रोच्चारण व पारंपरिक पूजा विधि-विधान के साथ चमोली जिले के देवाल विकास खंड के प्रसिद्ध वांण लाटू धाम के कपाट सोमवार को छह माह के लिए आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गए हैं। इस मौके पर प्रदेश के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कपाट खुलने की तमाम धार्मिक परंपराओं में सम्मिलित हो कर प्रदेश व देश की खुशहाली के लिए प्रार्थना की।
बैसाख पूर्णमासी के पावन पर्व पर सोमवार को प्रातः काल से ही लाटू धाम वांण में कपाट खुलने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई थी। इसके तहत वांण सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के नंदा एवं लाटू देवता के भक्त मंदिर परिसर में जुटने लगे थे। हवन, यज्ञ व अन्य पारंपरिक पूजा विधान के बाद शुभ लग्नानुसार दोपहर एक बजे मंदिर के बाहरी कपाटों को खोलते हुए इस मंदिर के रहस्यमयी गर्भगृह का कपाट खोला गया। इस दौरान मंदिर के मुख्य पुजारी खीम सिंह ने आंखों में पट्टी बांध कर रहस्यमयी गर्भगृह में विशेष पूजा अर्चना की। इसके बाद मंदिर परिसर में लोक स्तुति के तहत झोड़ों का आयोजन किया गया। इन झोड़ों में देवस्तुति के दौरान कई लोगों पर नंदा भगवती, लाटू सहित कई अन्य देवी, देवता अवतारित हुए। जिन्होंने श्रद्वालुओं को आशीर्वाद दिया।
लाटू धाम के कपाटोद्घाटन के मौके पर प्रदेश के पर्यटन, सिंचाई, लघु सिंचाई, संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज भी वांण गांव पहुंचे। यहां पर उन्होंने करीब पौने दो घंटों तक पूजा अर्चना कर देश व राज्य के विकास, खुशहाली, समृद्धि, निरोग्यता की मां नंदा भगवती, लाटू देवता सहित अन्य देवी देवताओं से प्रार्थना की। महाराज ने सभी पूजाओं में प्रतिभाग करने के साथ ही ग्रामीण, पुरूषों की ओर से गाये जाने वाले झोड़ो में भी शिरकत की। इस अवसर पर विधायक मुन्नी देवी शाह, हाटकल्याणी वार्ड के जिपंस कृष्णा बिष्ट, वांण की प्रधान पुष्पा देवी, क्षेपंस रामेश्वरी देवी, पूर्व क्षेपंस हीरा सिंह पहाड़ी, हीरा सिंह बुग्याली, महिला मंगल दल की अध्यक्षा नंदी देवी, युमंद अध्यक्ष देवेंद्र बिष्ट, सरपंच महिपत सिंह आदि ने महाराज सहित अन्य अतिथियों का स्वागत किया। जबकि कपाटोद्घाटन की प्रक्रिया में मंदिर के मुख्य पुजारी खीम सिंह बिष्ट, नारायण सिंह पिमोली, गब्बर सिंह दानू, पंडित हरी दत्त कुनियाल, रमेश कुनियाल, उमेश कुनियाल आदि ने भूमिका निभाई।
उल्लेखनीय है कि लाटू देवता के प्रति अटूट आस्था के चलते दूर-दूर से श्रद्धालुओं के आने का तांता लगा रहता है। हिमालयी महाकुंभ नंदा देवी राजजात यात्रा का ये आखिरी पड़ाव है, इसके बाद निर्जन पड़ाव शुरू हो जाते हैं। रूपकुंड, बेदनी बुग्याल और आली बुग्याल का बेस कैंप वाण गांव है। लाटू देवता के मंदिर के अंदर क्या है, किसी को नहीं मालूम। बारह बरस बाद जब नंदा मायके (कांसुवा) से ससुराल (कैलाश) जाते हुए वाण पहुंचती हैं, तब इस दौरान नंदा का लाटू से भावपूर्ण मिलन होता है। इस दृश्य को देख यात्रियों की आंखें छलछला जाती हैं। यहां से लाटू की अगुआई में चैसिंग्या खाडू के साथ राजजात होमकुंड के लिए आगे बढ़ती है। लेकिन, वाद्य यंत्र राजजात के साथ नहीं जाते। वहीं मान्यता है कि वाण में ही लाटू सात बहनों (देवियों) को एक साथ मिलाते हैं। लाटू देवता पूरे पिंडर दशोली(आंशिक) क्षेत्र के ईष्टदेव हैं। दूर-दूर से लोग अपनी मनोकामना लेकर लाटू के मंदिर में आते हैं। कहते हैं यहां से मांगी मनोकामना जरुर पूरी होती है।
